पीएम मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति संग की बैठक : रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने समेत कई मुद्दों पर हुई चर्चा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने शनिवार को यहां प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की, जिसमें भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर चर्चा की गयी। हैदराबाद हाउस में हुई वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा तथा बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।
वार्ता के दौरान भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, विदेश सचिव विक्रम मिस्री तथा विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल उपस्थित थे। इससे पहले दा सिल्वा का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तथा पीएम मोदी ने उनका स्वागत किया।
राष्ट्रपति दा सिल्वा ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात की तथा राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।ब्राजील के राष्ट्रपति ने शुक्रवार को नयी दिल्ली में ब्राजीलिया की व्यापार एवं निवेश संवर्धन एजेंसी (एपेक्सब्राजील) के पहले कार्यालय का उद्घाटन किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि यह कार्यालय ब्राजील के उत्पादों और सेवाओं को विदेशों में बढ़ावा देने तथा ब्राजील की अर्थव्यवस्था के रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी निवेश आकर्षित करने में सहायक होगा।
भारत में ब्राजील के राजदूत केनेथ दा नोब्रिगा ने दोनों नेताओं के बीच बढ़ते तालमेल को रेखांकित करते हुए कहा कि यह द्विपक्षीय संबंधों को ऐतिहासिक रूप से एक नये स्तर पर ले जा रहा है। उन्होंने बताया कि दा सिल्वा अपने साथ अब तक का सबसे बड़ा ब्राजीलिया का प्रतिनिधिमंडल लेकर आये हैं, जिसमें 11 से अधिक कैबिनेट मंत्री, 300 से ज्यादा कारोबारी और 50 मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल हैं।
दा सिल्वा की यह यात्रा मोदी की जुलाई 2025 में ब्रासीलिया यात्रा के बाद हो रही है, जो पांच दशकों से अधिक समय में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ब्राजील की पहली यात्रा थी। दोनों नेताओं ने जनवरी में टेलीफोन पर बातचीत के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया था और साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार के महत्व पर बल दिया था।
