संपादकीय: सेवा केंद्रित शासन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक का ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में आयोजन प्रतीक और संदेश दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। यह बैठक ऐतिहासिक कही जाएगी, क्योंकि सरकार ने बैठक के स्थान और संकल्प दोनों को शासन को सत्ता-केंद्रित नहीं, सेवा-केंद्रित बनाने के महत्वपूर्ण वैचारिक फ्रेम में रखा। ‘
नागरिक देवो भवः’ और ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की तीव्र गति जैसे वाक्यांश प्रशासनिक आचरण के लिए सार्वजनिक प्रतिज्ञा के बतौर स्थापित हुए, हालांकि पूर्ववर्ती सरकारें अपना जो भी निर्णय लेती थीं, जनहित में ही लिया हुआ बताती थीं, किंतु इस तरह का औपचारिक, मूल्य-आधारित संकल्प सार्वजनिक रूप से दोहराना जवाबदेही को संस्थागत रूप देने का आश्वस्तकारी प्रयास लगता है, विशेषकर उस समय जब 2047 तक भारत को शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने का लक्ष्य रखा गया हो।
वर्तमान वृद्धि दर, पूंजीगत व्यय, डिजिटलीकरण और विनिर्माण प्रोत्साहन के आधार पर यह लक्ष्य असंभव नहीं, पर बहुत सरल भी नहीं। 6 से 8 प्रतिशत की सतत आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और उत्पादकता-वृद्धि की निरंतरता इसके लिए अनिवार्य होगी। ‘सेवा तीर्थ’ को यदि ऐसे गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर अथवा तंत्र का रूप दिया जाए, जहां प्रक्रियाएं सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हों, तो यह गतिशीलता ला सकता है, परंतु प्रतीक से अधिक महत्वपूर्ण क्रियान्वयन है, जिसकी असली कसौटियां सिंगल-विंडो क्लियरेंस, समयसीमा-आधारित सेवा वितरण और डेटा-आधारित फैसले होंगे। सरकार का यह विश्वास दिलाना कि पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक संवेदनाओं के प्रति सजग गवर्नेंस मॉडल को और अधिक मजबूती दी जाएगी, स्वागत योग्य है। केरल का नाम ‘केरलम्’ करने के प्रस्ताव का सांस्कृतिक आयाम अधिक है।
नाम-परिवर्तन पहचान और भाषा-गौरव से जुड़ा होता है, इसका आर्थिक प्रभाव प्रशासनिक लागत और ब्रांडिंग-संगति का ध्यान रखा जाए तो भी सीमित रहता है। राज्यों के नाम उनकी भाषानुरूप बदलना बेहतर है, पर बुनियादी ढांचे, सुरक्षा व सेवाओं की बेहतरी पर भी ध्यान देना आवश्यक है। इतिहास बताता है कि जिन राज्यों या शहरों के नाम बदले गए, वहां सार्थक आर्थिक परिवर्तन नाम से नहीं, नीतियों से आए। रेलवे की तीन बड़ी परियोजनाओं की मंजूरी से संबंधित क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, औद्योगिक क्लस्टर जुड़ेंगे और माल ढुलाई बढ़ेगी। रेलवे को यात्री-आधारित आय से आगे बढ़कर माल-राजस्व सुदृढ़ करने का अवसर मिलेगा।
पावर सेक्टर सुधार डिस्कॉम दक्षता, स्मार्ट मीटरिंग और ग्रिड आधुनिकीकरण दीर्घकाल में वित्तीय घाटे कम करेंगे और उद्योग को पर्याप्त बिजली देंगे, जो निवेश आकर्षित करने में सहायक होगी। श्रीनगर हवाई अड्डे पर सिविल एनक्लेव और इंटीग्रेटेड टर्मिनल से यात्री-क्षमता, सुरक्षा और कनेक्टिविटी बढ़ेगी। पर्यटन, व्यापार और आपात सेवाओं को लाभ मिलेगा, स्थानीय रोजगार भी सृजित होगा। कच्चे जूट की एमएसपी को 5,925 रुपये करने से पूर्वी भारत, विशेषकर पश्चिम बंगाल, असम और बिहार के जूट किसानों को सीधा लाभ होगा, हालांकि इसका लाभ तभी है जब प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात मांग समानांतर बढ़ें; अन्यथा सरकारी खरीद का बोझ और भंडारण-चुनौतियां बढ़ेंगी।
