कॉर्डेलिया क्रूज मामला : दिल्ली हाईकोर्ट ने समीर वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को दी मंजूरी

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Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ मामले के संबंध में आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ शुक्रवार को अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) के उस आदेश के खिलाफ केंद्र की याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें इस मामले में वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द कर दिया गया था। 

फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा, ''याचिका स्वीकार की जाती है।'' फैसले की विस्तृत प्रति की प्रतीक्षा है। केंद्र सरकार ने 19 जनवरी को पारित सीएटी के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा 18 अगस्त, 2025 को वानखेड़े को जारी किए गए 'चार्ज मेमोरेंडम' (आरोपपत्र) को रद्द कर दिया गया था। 

वर्ष 2008 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी वानखेड़े उस समय सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने 2021 में मुंबई के स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) में अपने कार्यकाल के दौरान अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ कांड में फंसाने की धमकी देकर उनके परिवार से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की मांग की थी। सीएटी के समक्ष वानखेड़े ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा उनके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक जांच को चुनौती देते हुए एक मूल आवेदन दायर किया। 

एनसीबी से कार्यमुक्त होने के बाद भी कथित रूप से उसके कानूनी विभाग से गोपनीय जानकारी मांगने के लिए अनुशासनात्मक जांच शुरू की गई थी। यह भी आरोप लगाया गया कि उन्होंने एनसीबी के विधिक अधिकारी से जांच की ''दिशा मोड़ने'' का ''आश्वासन'' भी मांगा था।

उच्च न्यायालय ने 12 जनवरी को वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने वाले सीएटी के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, उच्च न्यायालय ने सीएटी से 14 जनवरी को या अगले 10 दिनों के भीतर मुख्य मामले पर फैसला करने के लिए ''ईमानदारी से प्रयास'' करने को कहा था।  

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