Uttrakhand: तराई में अंतर्राष्ट्रीय और अंतर्राज्यीय बॉर्डर तक के जंगलों में हाई अलर्ट
हल्द्वानी, अमृत विचार। उत्तराखंड वन विभाग ने होली पर्व के मद्देनजर तराई के जंगलों में हाई अलर्ट जारी किया है। फील्ड स्टाफ को जंगल की निगरानी विशेषकर उप्र बॉर्डर से सटे जंगलों में विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
तराई पूर्वी वन डिवीजन के जंगल नैनीताल, ऊधम सिंह नगर और चम्पावत तक उत्तर प्रदेश व नेपाल बॉर्डर तक फैले हुए हैं। होली के त्योहारी सीजन के मद्देनजर संभावित घुसपैठ और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों को रोकने के लिए वन डिवीजन में हाई अलर्ट घोषित किया गया है ताकि किसी भी तरह की अवैध गतिविधि, शिकार या अनधिकृत प्रवेश की घटना न हो सके। फील्ड स्टाफ का अवकाश निरस्त कर दिया गया है।
लगभग 400 वन कर्मी जंगलों के चप्पे-चप्पे में तैनात रहेंगे। इसके अलावा 5 ड्रोन और 1 मोटर बोट से पैट्राेलिंग हो रही है। उप्र से सटे खटीमा में विशेष निगरानी की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि त्योहारों के समय वन अपराधी छुट्टियों का फायदा उठाकर जंगल क्षेत्र में घुसने या अवैध शिकार जैसी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं। इसकी रोकथाम के लिए यह कदम उठाया गया है।
डीएफओ तराई पूर्वी वन डिवीजन होली पर छुट्टियों के मद्देनजर फील्ड स्टाफ का अवकाश निरस्त कर नेपाल व उप्र बॉर्डर पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। वन कर्मियों को विशेष परिस्थिति में ही अवकाश मिलेगा। जंगलों में ड्रोन और मोटर बोट से भी गश्त की जाएगी।
आज जंगलात पनियाली में बांटेगा सोलर लाइट्स और चारापत्ती
वन विभाग ने जंगलों में ग्रामीणों को जाने से रोकने के लिए रणनीति भी बना ली है। आज पनियाली में सोलर लाइट्स लगाने के साथ ही चारा पत्ती का वितरण होगा। वहीं, बाघ की तलाश में एक टीम और बढ़ा दी गई है। अब दो पशु चिकित्सकों के नेतृत्व में टीमें बाघ की तलाश कर रही हैं। रामनगर डीएफओ ध्रुव सिंह मर्तोलिया ने बताया कि मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की बड़ी वजह चारा है। इस समस्या के समाधान के लिए वन विभाग ने जंगल से सटे गांवों में चारा पत्ती बांटने का निर्णय लिया है। आज ग्रामीणों को चारा पत्ती के लिए स्लेज बांटी जाएगी। इसके अलावा शाम को वन्यजीवों से बचाने के लिए बॉर्डर पर सोलर लाइट्स लगाई जाएंगी।
उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों से बाघ को ट्रैंकुलाइज करने की अनुमति मिलने के बाद बीते गुरुवार को एक टीम लगाई गई थी लेकिन बाघ पकड़ में नहीं आया। इसके बाद शुक्रवार को दो पशु चिकित्सकों के नेतृत्व में दो अलग-अलग टीमें जंगल में बाघ की तलाश में लगी हुई हैं। पिंजड़ों की संख्या भी बड़ा दिया है। घटना स्थल पर बड़ा शिकार रखा गया है ताकि बाघ दोबारा आए तो पिंजड़े में फंस सके। फिलहाल वन टीमें गश्त भी कर रही हैं। हैरानी की बात यह है कि 26 ट्रैपिंग कैमरा लगाए थे लेकिन बाघ इनमें भी कैद नहीं हो सका है।
वन अधिकारियों के अनुसार, बीती 25 फरवरी को पनियाली के जंगलों में घास लेने गई कमला फर्त्याल (53) निवासी कठघरिया को बाघ ने निवाला बना लिया था। इसके अलावा पीपलपोखरा में भी एक महिला को निवाला बनाया था। इसके बाद यहां ग्रामीणों ने जमकर हंगामा काटा था और बाघ को पकड़ने की मांग की थी।
