मनरेगा कर्मियों को आठ माह से नहीं मिला मानदेय, होली से पहले भी खाली
अमृत विचार, लखनऊ : प्रदेश में मनरेगा के तहत कार्यरत कर्मियों को सात माह से मानदेय नहीं मिला है। कई जिले ऐसे हैं जहां 10 माह से बकाया है। इनमें अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, तकनीकी सहायक, लेखा सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर जिला व ब्लॉकों पर तैनात हैं। सबसे अधिक संख्या ग्राम रोजगार सेवकों की 44 हजार के आसपास है। मनरेगा की सोशल ऑडिट सेल का हाल भी खराब है। यहां तैनात सदस्यों को आठ माह से मानदेय नहीं मिला है।
दिवाली पर भी इन्हें मानदेय नहीं मिला था और होली पर भी भुगतान होने की कोई उम्मीद या प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। ऐसे में कर्मचारी बिना मानदेय काम कर रहे हैं। कई की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है न भरण-पोषण कर पा रहे न ही बच्चों की पढ़ाई और उपचार करा पा रहे। श्रमिकों को भी मजदूरी नहीं मिली है। मनरेगा कर्मचारी महासंघ के प्रदेश संयोजक भूपेश कुमार सिंह ने बताया कि बराबर मानदेय के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन सुनवाई कहीं पर नहीं हो रही है।
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