भारत में क्रिकेटरों की कमाई पर समझें टैक्स का पूरा खेल, मैच फीस से लेकर IPL सैलरी और एंडोर्समेंट की ये है पूरी कहानी

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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नई दिल्लीः मैदान पर रन बनाना आसान लगता है, लेकिन क्रिकेटरों को अपनी हर कमाई पर आयकर विभाग को हिसाब देना पड़ता है। चाहे वो BCCI से मिलने वाली मैच फीस हो, IPL की मोटी सैलरी, प्राइज मनी हो या ब्रांड एंडोर्समेंट सब पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू होते हैं। यहां हम समझाते हैं कि भारतीय क्रिकेटरों को मैच फीस पर कितना टैक्स चुकाना पड़ता है और बाकी इनकम पर क्या नियम हैं (2025-26 के अपडेटेड नियमों के आधार पर)।

मैच फीस पर टैक्स नियम

- कैटेगरी: मैच फीस को "व्यवसाय या पेशे से आय" (Income from Business/Profession) माना जाता है।

- टैक्स रेट: व्यक्तिगत इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार (नया रिजीम में ऊपरी स्लैब 30% तक + सरचार्ज और सेस)।

- TDS: BCCI मैच फीस पर 10% TDS काटता है (धारा 194J / 393 के तहत)।

- GST: प्रोफेशनल सर्विस पर 18% GST लगता है (सरकारी मैचों को छोड़कर)।

- रेजिडेंसी स्टेटस: 
  - भारतीय रेजिडेंट क्रिकेटर → वैश्विक आय (विदेशी मैच फीस भी) पर टैक्स।
  - NRI क्रिकेटर → सिर्फ भारत में कमाई पर टैक्स।

उदाहरण से अगर समझाया जाए तो अगर किसी क्रिकेटर को 1 करोड़ की मैच फीस मिलती है, तो BCCI 10% TDS (10 लाख) काटेगा। यह कटौती इनकम टैक्स अधिनियम 2025 की धारा 393 (पहले आयकर अधिनियम 1961 की धारा 194J) के तहत की जाती है। बाकी पर स्लैब रेट से टैक्स + 18% GST लागू होगा। हालांकि, सरकार द्वारा आयोजित मैचों के मामले में इस पर जीएसटी लागू नहीं होता है।

प्राइज मनी और अवॉर्ड्स पर टैक्स

क्रिकेटरों को मैच या टूर्नामेंट में मैन ऑफ द मैच या विजेता के रूप में मिलने वाली इनाम राशि (prize money) को अन्य स्रोतों से आय माना जाता है। इस पर 30% की दर से कर लगता है (साथ ही लागू सरचार्ज और सेस के साथ प्रभावी दर थोड़ी अधिक हो सकती है)। पुरस्कार देने वाली संस्था (जैसे BCCI या अन्य) द्वारा इस राशि पर 30% TDS (Tax Deducted at Source) पहले ही काट लिया जाता है, जो अग्रिम कर के रूप में जमा होता है।

हालांकि, सरकारी पुरस्कार जैसे अर्जुन अवॉर्ड, अन्य राष्ट्रीय सम्मान, या ओलंपिक/एशियाई खेलों के मेडल विजेताओं को केंद्र/राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले इनाम इस कर से मुक्त होते हैं। ये छूट आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(17A) के तहत उपलब्ध है, और आयकर अधिनियम, 2025 की अनुसूची II (क्रमांक 10) में भी इसका प्रावधान है। ऐसे पुरस्कार सार्वजनिक हित में दिए जाते हैं और सरकार द्वारा अनुमोदित होते हैं, इसलिए पूरी तरह कर-मुक्त रहते हैं।

IPL और प्राइवेट लीग्स पर टैक्स

क्रिकेटरों को आईपीएल और अन्य निजी लीगों से प्राप्त होने वाली राशि जैसे की ऑक्शन फीस, साइनिंग बोनस, रिटेंशन मनी आदि—को व्यवसाय या पेशे से आय (Income from Business or Profession) माना जाता है। यह आय आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत आती है और खिलाड़ी की कुल आय के आधार पर व्यक्तिगत आयकर स्लैब दरों (जो आमतौर पर उच्च स्लैब में 30% तक होती है, साथ ही सरचार्ज और सेस) के अनुसार कर योग्य होती है।

फ्रैंचाइजी (IPL टीम) द्वारा इस राशि पर 10% TDS (Tax Deducted at Source) काटा जाता है, जो धारा 194J के तहत लागू होता है (यह प्रोफेशनल सर्विसेज या फीस पर लागू TDS है)। यह TDS अग्रिम कर के रूप में काटा जाता है, जिसे खिलाड़ी अपनी आयकर रिटर्न में एडजस्ट कर सकता है।

इसके अलावा, क्रिकेटरों को इस आय पर 18% GST (Goods and Services Tax) भी चुकाना पड़ता है, क्योंकि यह प्रोफेशनल सर्विसेज के रूप में मानी जाती है। इससे उनकी कुल टैक्स देयता काफी बढ़ जाती है, हालांकि कुछ स्रोतों के अनुसार मैच फीस पर GST नहीं लगता, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट/ऑक्शन राशि पर लागू हो सकता है (GST नियमों के आधार पर रिवर्स चार्ज या डायरेक्ट)।

 

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