संपादकीय: यह सख्ती जरूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे में पेट्रोल-डीजल तथा घरेलू और व्यावसायिक गैस के बारे में भारी किल्लत की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त दंड की चेतावनी दी है, तो वहीं प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। बेशक, आपदा में अवसर तलाशने वाले जब मात्र आशंका को संकट बता कर अपने लाभ के लिए विभिन्न माध्यमों के जरिए अफवाह फैलाकर उसे भुना रहे हों और जब इससे आम जनता में भारी अफरातफरी की मच सकती हो, तब सरकार का यह सख्त कदम अत्यंत उचित और सामयिक है।
इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध ने तेल संकट गहरा दिया है और इसकी वजह से वैश्विक स्तर पर तेल और गैस ईंधन की किल्लत आ सकती है। देश के कई राज्यों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों को प्राथमिकता और आवश्यकतानुसार ही आपूर्ति हो रही है। कुछ राज्यों और शहरों के होटल संगठनों ने गैस की आपूर्ति कम होने और व्यवसाय के संकट की बात दर्ज कराई है। गैस एजेंसियों ने घरेलू गैस बुकिंग में चार दिन के बढ़ोतरी कर दी है।
पर यह सब होने के बावजूद अभी यह संकट इतना नहीं गहराया है कि देश में जीवाश्म ईंधन का अकाल पड़ गया हो, सरकार के अनुसार हमारे पास अभी भी काफी रिजर्व है और हम दूसरे देशों तथा रास्तों से तेल और गैस आपूर्ति के तरीके तलाश चुके हैं। दो एलएनजी कार्गो भारत पहुंच रहे हैं, रूस से तेल खरीद 50 फीसद बढ़ा दी गई है। इसके अलावा तेल गैस समस्या के दूसरे समाधानों पर भी प्रयास जारी है। निःसंदेह, तेल और गैस संबंधी अफवाहें बाजार और सियासत की चालें ज्यादा लगती हैं, वास्तविकता कम। असल में किसी जिंस या वस्तु की कमी की अफवाहें फैला कर जमाखोरी, मुनाफाखोरी और आमजन का भयादोहन कर पैसे बनाने के प्रवृत्ति हमारे बाज़ार में पुरानी है।
आज तो संकट की प्रत्यक्ष आशंका भी है, पर कभी-कभी देश के किसी राज्य अथवा किसी क्षेत्र में अचानक, नमक, खाद्य तेल, अथवा ऐसे ही रोजमर्रा के अत्यावश्यक सामान की आवक न आने अथवा कमी की अफवाह उड़ा कर जनता को अतिरिक्त खरीदारी के लिए उकसाया जाता है। देखते-देखते ही जमाखोरों के कारण सामान की वास्तव में किल्लत हो जाती है, उसके दाम महंगे। देश में बहुत से लोग तकरीबन रोज की कमाई पर जिंदा हैं। उनके पास अतिरिक्त या अधिक खरीद की क्षमता ही नहीं है। वे अलग मुश्किल में पड़ जाते है, फिलहाल वैश्विक तेल संकट के मद्देनजर इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा इमरजेंसी तेल स्टाक, 40 करोड़ बैरल तेल उपलब्ध कराने जा रहा है। भारत भी घरेलू संकट निवारण की पूर्व नियोजित आवश्यक कार्रवाई कर रहा है।
सोशल मीडिया के समय में अफवाहें आसानी से और प्रभावी तरीके से फैला, सरकार की अक्षमताओं को परिवर्धित कर दिखाना आसान है। ऐसे गाढ़े समय का राजनीतिक लाभ लेना कतई उचित नहीं है। जनता में भय फैलाने के बजाए ईंधन के विवेकपूर्ण इस्तेमाल के लिए जागरूकता फैलाना जरूरी है। उम्मीद है, मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अफवाहों पर रोक लगेगी।
