स्ववित्तपोषित शिक्षकों को उम्मीद : कैशलेस इलाज के बाद सरकार पूरी करेगी यूजीसी वेतनमान की मांग
कानपुर। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्ववित्तपोषित शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिये उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुये अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ ने उम्मीद जतायी है कि अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षकों की वर्षों से लंबित यूजीसी वेतनमान (कैश) की मांग को भी सरकार जल्द पूरा करेगी।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं डीबीएस कालेज में प्रवक्ता डॉ. अरुणेश अवस्थी ने शनिवार को कहा कि प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में दोहरी व्यवस्था के तहत संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत लगभग 3000 शिक्षक परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान किए जाने का योगी सरकार के निर्णय से शिक्षक परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का एक मजबूत आधार प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय अत्यंत मानवीय और शिक्षक हित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
इस निर्णय से प्रदेश के हजारों स्ववित्तपोषित शिक्षकों और उनके परिवारों को आकस्मिक चिकित्सा परिस्थितियों में आर्थिक कठिनाइयों से राहत मिलेगी और शिक्षक अधिक समर्पण तथा उत्साह के साथ अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे। स्ववित्तपोषित शिक्षक संगठन ने इसके लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए आशा जताई कि अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षकों की वर्षों से लंबित यूजीसी वेतनमान (कैश) की मांग को भी जल्द ही सरकार पूरा करेगी।
गौरतलब है कि पिछले मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने उच्च शिक्षा के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने का निर्णय लिया था। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। शिक्षकों का समाज निर्माण और शिक्षण व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान होता है, लेकिन अब तक उन्हें चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने 5 सितम्बर 2025 (शिक्षक दिवस) के अवसर पर उच्च शिक्षा के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की थी। उन्होने बताया था कि उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों तथा राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को इस योजना के अंतर्गत लाया जाएगा।
साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत शिक्षकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मंत्री ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत प्रति शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी 2479.70 रुपये का प्रीमियम व्यय होगा। प्रदेश में लगभग दो लाख से अधिक शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस योजना से लाभान्वित होंगे और इस पर सरकार को लगभग 50 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का व्यय वहन करना पड़ेगा। इस व्यय की व्यवस्था उच्च शिक्षा विभाग के बजट से की जाएगी।
