विश्व शांति के लिए बुद्ध के संदेश जरूरी : केशव मौर्य

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Published By Deepak Mishra
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को प्रयागराज के अरैल स्थित सम्राट हर्षवर्धन बुद्ध विहार में बौद्ध कम्यून इंटरनेशनल परिवार की ओर से स्थापित 19 शिलालेखों की प्रतिकृतियों का लोकार्पण किया। इनमें भगवान गौतम बुद्ध के संदेशों से जुड़े 14 प्रमुख शिलालेख भी शामिल हैं।

इन शिलालेखों की मूल धम्म लिपि ब्राहृमी स्क्रिप्ट में है और उनकी भाषा प्राकृत-पालि है, जिन्हें हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद के साथ स्थापित कराया गया है, ताकि लोग भगवान बुद्ध के संदेशों को आसानी से समझ सकें। इस अवसर पर केशव मौर्य ने कहा कि भगवान तथागत बुद्ध के संदेश श्रीलंका सहित दुनिया के करीब 40 देशों तक पहुंचे हैं और यही देश भारत से सांस्कृतिक रूप से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि यदि भारत सहित ये सभी देश एकजुट हो जाएं तो दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति बन सकते हैं।उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सामने विश्व युद्ध का संकट मंडरा रहा है, लेकिन इस संकट से मानवता को बचाने का रास्ता भगवान बुद्ध के संदेशों में ही है। उन्होंने युद्ध में शामिल देशों से आह्वान करते हुए कहा कि वे बुद्ध की शरण में आएं और शांति का मार्ग अपनाएं-"बुद्धम् शरणम् गच्छामि।" 

केशव मौर्य ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार बौद्ध तीर्थ स्थलों का भी तेजी से विकास कर रही है। उन्होंने बताया कि वाराणसी के सारनाथ, श्रावस्ती और कुशीनगर में विकास कार्य किए गए हैं तथा कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बनाया गया है। उन्होंने घोषणा की कि प्रयागराज के सम्राट हर्षवर्धन बुद्ध विहार में भी जल्द एक ध्यान केंद्र बनाया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि सरकार बिना किसी भेदभाव के विकास कार्य कर रही है। जो लोग भगवान बुद्ध के विचारों को अपनाना चाहते हैं, वे बुद्ध विहार आ सकते हैं, वहीं जो श्रद्धालु भगवान हनुमान के दर्शन करना चाहते हैं, वे बंधवा वाले हनुमान मंदिर जा सकते हैं, या माधव (वेनी माधव) तथा माता अलोप शंकरी के दर्शन कर सकते हैं। 

इस मौके पर मौर्य ने खुद को चंद्रगुप्त मौर्य, बिंदुसार और सम्राट अशोक का वंशज बताते हुए कहा कि उन्हें इस पर गर्व है। उन्होंने कहा कि चंद्रगुप्त मौर्य ने जीवन के अंतिम समय में जैन धर्म की शिक्षाओं के अनुसार शरीर त्याग किया था, इसलिए वे स्वयं को जैन और बौद्ध दोनों परंपराओं से जुड़ा मानते हैं। उन्होंने कहा कि सम्राट बिंदुसार हिंदू विचारों के समर्थक थे, जबकि भगवान बुद्ध के विचारों को व्यापक रूप देने का कार्य महान सम्राट अशोक ने किया।  

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