कैप्टिव पावर अमेंडमेंट रूल्स से डिस्कॉम पर मंडराया खतरा... इस नियम के तहत औद्योगिक कंपनियां खुद लगा सकेंगी बिजली घर

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
On

औद्योगिक उपभोक्ता हैं डिस्काम की मुख्य आय का साधन

लखनऊ, अमृत विचार: केंद्र सरकार द्वारा कैप्टिव इलेक्ट्रिसिटी पावर अमेंडमेंट रूल्स लागू करने से बिजली वितरण कंपनियों पर वित्तीय खतरा मंडरा सकता है। इस नए नियम के तहत औद्योगिक कंपनियां अपने निजी बिजली घर लगा सकेंगी। जबकि डिस्काम की आय का साधन औद्योगिक कंपनियों को दी जा रही बिजली सप्लाई ही है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने विद्युत अधिनियम-2005 में संशोधन किया है। उसके स्थान नया कैप्टिव पावर इलेक्ट्रिसिटी संशोधन (अमेंडमेंट) रूल्स- 2026 लागू किया गया है। आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इस संसोधन अधिनियम का कड़ा विरोध किया है। फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि इन संशोधनों से देश की बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस नियम ने कैप्टिव पावर के दायरे को अत्यधिक व्यापक बना दिया है, जिससे बड़े औद्योगिक उपभोक्ता बड़ी संख्या में डिस्कॉम से बिजली खरीदने के बजाय कैप्टिव स्रोतों से बिजली लेना शुरू कर देंगे। इससे डिस्कॉम की बिजली बिक्री में भारी गिरावट आएगी।

सब्सिडी पर भी खतरा

उन्होंने कहा कि डिस्कॉम की आय का प्रमुख स्रोत औद्योगिक उपभोक्ता ही होते हैं, जो अपेक्षाकृत अधिक टैरिफ पर बिजली लेते हैं। उसी आय से घरेलू एवं कृषि उपभोक्ताओं को सब्सिडी दी जाती है। यदि उद्योग बड़ी संख्या में कैप्टिव पावर की ओर चले जाते हैं तो कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं को दी जाने वाली का पूरा ढांचा कमजोर हो जाएगा।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इन नियमों की व्यापक समीक्षा की जाए। साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती एवं विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधन किए जाएं।

संबंधित समाचार