मत्स्य पालकों के प्रशिक्षण-भ्रमण पर खर्च की सीमा तय, योगी सरकार ने किया कल्याण कोष के क्रियान्वयन में संशोधन
मछुआरों के प्रशिक्षण, प्रदर्शन व सेमिनार को और प्रभावी बनाने को शासनादेश
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश सरकार ने मत्स्य पालक कल्याण कोष के क्रियान्वयन से संबंधित दिशा-निर्देशों में संशोधन करते हुए प्रशिक्षण, भ्रमण, प्रदर्शन और सेमिनार जैसे कार्यक्रमों के संचालन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अंतर्राज्यीय भ्रमण, क्षमता विकास, प्रदर्शन और सेमिनार कार्यक्रमों के लिए मत्स्य पालकों व मछुआरों के प्रशिक्षण पर कोष से व्यय की व्यवस्था को संशोधित किया गया है।
मत्स्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, वर्ष 2023 में जारी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत मत्स्य पालकों और मछुआरों के प्रशिक्षण तथा भ्रमण कार्यक्रमों को और उपयोगी बनाने के उद्देश्य से संशोधन किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब राज्यांतर्गत तथा अंतर्राज्यीय भ्रमण, क्षमता विकास, प्रदर्शन और सेमिनार कार्यक्रमों के लिए मत्स्य पालकों व मछुआरों के प्रशिक्षण और भ्रमण पर कोष की निर्धारित सीमा तक व्यय किया जा सकेगा। इससे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का दायरा बढ़ेगा और मत्स्य पालकों को नई तकनीक और आधुनिक पद्धतियों की जानकारी मिल सकेगी।
शासनादेश में प्रशिक्षणार्थियों के चयन और प्रशिक्षण के प्रकार को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। प्रशिक्षण लेने के इच्छुक आवेदकों को आवेदन जनपदीय मत्स्य अधिकारी के कार्यालय में करना होगा। इसके बाद जनपदीय मत्स्य अधिकारी प्रस्ताव मत्स्य निदेशालय, उत्तर प्रदेश को भेजेंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड के मानकों के अनुसार संचालित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अधीन राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में भी समय-समय पर निर्धारित मानकों और दरों के अनुसार प्रशिक्षण कराया जा सकेगा।
