यूपी के बांदा को मिलेगी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान: GSI ने कालिंजर किले की पहाड़ी को हेरिटेज साइट किया घोषित 

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने सोमवार को ऐतिहासिक कालिंजर किले की पहाड़ी के क्षेत्र को राष्ट्रीय भू-विरासत स्थल घोषित किया है। इसका उद्घाटन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (उत्तरी क्षेत्र) के अपर महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष राजिंदर कुमार ने किया।

कार्यक्रम के दौरान राजिंदर कुमार ने बताया कि कालिंजर का किला क्षेत्र एक भूवैज्ञानिक घटना एपार्कियन अनकॉन्फ़ॉर्मिटी का प्रमाण है। यहां की 2.5 अरब वर्ष बुंदेलखंड ग्रेनाइट और 1.2 अरब साल पुराने कैमूर बलुआ पत्थर के करोड़ों वर्षों के इतिहास को दर्शाता है।

कार्यक्रम में इस बात का प्रचार किया गया कि कैसे यहां की विशिष्ट भू-आकृति ने ऐतिहासिक राजवंशों को सामरिक सुरक्षा प्रदान की। किले की दीवारों में लगा स्थानीय पत्थर यहां के अद्वितीय भू-सांस्कृतिक विरासत का परिचायक है।

कालिंजर के भूविरासत स्थल घोषित होने के साथ ही इस क्षेत्र के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा कालिंजर खजुराहो एवं चित्रकूट के साथ इस पर्यटन स्थल का भी विकास होगा एवं इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण इस समय के विशाल अभिलेखागार के संरक्षण और जन-जागरूकता के लिए विशेष सूचना बोर्ड स्थापित किया है जो इसकी भूवैज्ञानिक महत्वता दर्शाता है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि ओम मणि वर्मा, विधायक नरैनी, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के उपमहानिदेशक विमल प्रकाश गौड़, हेमंत कुमार (निदेशक), देवाशीष शुक्ला (प्रभारी निदेशक), अभिषेक शुक्ला, मयंक साहू (भूवैज्ञानिक), अभिषेक तिवारी, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी अमित कुमार शुक्ला, उप जिलाधिकारी नरैनी गौतम कुमार दिनकर, क्षेत्रीय अधिकारी प्रयागराज, राज रंजन कुमार जिला खनन अधिकारी बांदा, कृष्णकांत त्रिपाठी, अनुज कुमार, समीर दीवान आदि मौजूद रहे।

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