शीतला अष्टमी आज : बासी भोजन का भोग और व्रत का विशेष महत्व, जानिए शुभ मुहूर्त और नियम  

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचारः चैत्र मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी बुधवार को है। बासी (बसौड़ा) चढ़ाकर माता शीतला की पूजा की जाती है। शीतला अष्टमी के दिन कालाष्टमी व्रत का भी संयोग बन रहा है, जिससे इस तिथि का महत्व और बढ़ गया है। अष्टमी 11 मार्च को देर रात 2:17 बजे तक रहेगी। अष्टमी पर पूजा के लिए प्रातः 6:20 बजे से सायंकाल 6:13 बजे तक का समय अत्यंत शुभ है। इस अवधि में भक्तजन माता शीतला की पूजा-अर्चना कर व्रत रखते हैं और परिवार की आरोग्यता की कामना करते हैं।

स्कंद पुराण में माता शीतला का विस्तृत वर्णन मिलता है। माता शीतला अपने हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते धारण करती हैं। वह गर्दभ (गधे) की सवारी करती हैं। मान्यता है कि उनके कलश में शीतल, स्वास्थ्यवर्धक और रोगाणुनाशक जल भरा होता है, जो भक्तों को रोगों से मुक्ति प्रदान करता है। 

सप्तमी को घरों में पूड़ी, पुआ, दाल-भात, मिठाई, सब्जी आदि बनाए जाते हैं। अगले दिन इसी से माता शीतला को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को चेचक, खसरा, ज्वर, फोड़े-फुंसी, पीत-ज्वर, नेत्र रोग और अन्य शीतजनित रोगों से रक्षा मिलती है। श्रद्धालु माता शीतला से परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

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