48 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में आखिर हुआ इंसाफ... जीवित बचे एकमात्र अभियुक्त को जाना होगा जेल
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लगभग 48 साल पुराने दोहरे हत्याकांड मामले में एकमात्र बचे जीवित अभियुक्त की अपील को खारिज कर दिया है। उक्त अभियुक्त जमानत पर है जिसे न्यायालय ने दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।
यह निर्णय न्यायमूर्ति रजनीश कुमारऔर न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने अवध नारायण व अन्य की ओर से दाखिल अपील पर पारित किया है। मामले के तीन अभियुक्तों अवध नारायण, बलवंत सिंह व जंगी उर्फ बलराम सिंह की अपील के विचाराधीन रहने के दौरान मृत्यु हो चुकी थी। वर्तमान निर्णय सिर्फ एकमात्र जीवित बचे अपीलार्थी मुकुंडी सिंह के संबंध में पारित किया गया है। मामला अयोध्या जनपद का है। कोतवाली नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत 13 मई 1978 को तरंग टॉकीज के पास साइकिलस्टैंड के ठेके पर विवाद हुआ जिसके चलते अभियुक्तों ने प्रभाकर दुबे और राम अंजोर पांडेय की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। सत्र अदालत 8 दिसंबर 1982 को उपरोक्त चारों अभियुक्तों को आईपीसी की धारा 302 व 149 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। न्यायालय ने पाया कि गवाहों केबयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य अभियोजन पक्ष के केस को सही साबित करनेके लिए पर्याप्त है। अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानून के अनुरूप है और उसमें कोई त्रुटि नहीं है। न्यायालय ने मुकुंदी सिंह की अपील को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।
