अली लारीजानी और सुलेमानी की मौत के बाद बेकाबू हुआ ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों पर कर दी मिसाइलों और ड्रोनों की बौछार
तेहरीनः इजरायल की सेना ने ईरान के दो प्रमुख सुरक्षा चेहरों को निशाना बनाकर बड़ा प्रहार किया है। इनमें से एक अली लारीजानी थे, जो ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव थे और देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शुमार किए जाते थे। दूसरे थे जनरल गोलामरेजा सुलेमानी (Gholamreza Soleimani), जो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की बसीज मिलिशिया के कमांडर थे। दोनों की मौत की पुष्टि ईरानी अधिकारियों ने भी कर दी है। ये हत्याएं ईरान के शासन के लिए गहरा आघात हैं, खासकर तब जब सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत युद्ध के पहले दिन ही हो चुकी है। इन दोनों अधिकारियों ने ही ईरान में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों को दबाने में अहम भूमिका निभाई थी।
मिसाइलों और ड्रोनों की बौछार
ईरान इस हमले से आगबबूला हो गया है। बदले में उसने इजरायल और खाड़ी देशों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए। तेल अवीव के आसपास के इलाकों में धमाकों की गूंज सुनाई दी, जबकि रामत गान क्षेत्र में दो लोगों की मौत की खबर है। खाड़ी देशों के एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर हमलों को नाकाम कर दिया, लेकिन दुबई में भी इंटरसेप्टर्स से गिरते मलबे की वजह से धमाकों की आवाजें गूंजीं। इजरायल में ईरानी हमलों से अब तक दर्जनों मौतें और हजारों घायल हुए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की जिद बरकरार
युद्ध के बीच ईरान ने साफ ऐलान किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ नहीं छोड़ेगा। यह वैश्विक तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ईरान ने कुछ जहाजों पर हमले भी किए, जिससे शिपिंग ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नतीजतन, अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज उछाल आया है और वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO और अन्य सहयोगी देशों से इस जलमार्ग की सुरक्षा के लिए मदद मांगी, लेकिन कई देशों ने साथ देने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने बाद में कहा कि अमेरिका को किसी की जरूरत नहीं, वह अकेले ही इसे संभाल लेगा।
बुशेहर न्यूक्लियर प्लांट पर हमले की रिपोर्ट
इस बीच इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने ईरान से मिली रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि बुशेहर न्यूक्लियर पावर प्लांट कॉम्प्लेक्स पर एक प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ था। हालांकि, IAEA के मुताबिक किसी को चोट नहीं आई और प्लांट को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा। एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने दोनों पक्षों से "न्यूक्लियर दुर्घटना के खतरे को रोकने के लिए अधिकतम संयम" बरतने की अपील दोहराई है।
मौतों का सिलसिला जारी
इजरायल का दावा है कि उसके हमले ईरान के शासन को कमजोर करने के मकसद से हैं। ईरानी हमलों में इजरायल में 14 से ज्यादा लोग मारे गए हैं और 2300 से अधिक घायल हुए हैं। अमेरिकी सेना के भी कम से कम 13 जवान इस संघर्ष में शहीद हो चुके हैं। ईरानी रेड क्रिसेंट और अन्य स्रोतों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध में ईरान में 1,300 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, हालांकि कुछ स्वतंत्र रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा कहीं ज्यादा बताया जा रहा है। लेबनान में इजरायल ने हिजबुल्लाह ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं।
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी की मौत की पुष्टि
ईरान ने बुधवार तड़के आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उसके शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की मौत हो गई है। परिषद सचिवालय ने स्थानीय समयानुसार बुधवार तड़के एक बयान जारी कर लारीजानी के मारे जाने की घोषणा की। इस बयान में उन्हें ताउम्र सार्वजनिक सेवा करने वाला बताते हुए "शहीद" कहा गया है।
इससे पहले मंगलवार को इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा था कि उसके हमले में लारीजानी मारे गए हैं लेकिन तब ईरान ने इस पर कोई प्रतिक्रिया या पुष्टि नहीं की थी। ईरान परिषद के अनुसार, श्री लारीजानी के साथ उनके बेटे और सुरक्षाकर्मियों सहित कई अन्य लोग भी मारे गए हैं। वक्तव्य में लारीजानी के लंबे राजनीतिक करियर की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक ऐसी शख्सियत बताया गया जिसने जीवन के अंतिम क्षणों तक ईरान की प्रगति और बाहरी खतरों के खिलाफ एकजुटता के लिए काम किया। इससे पहले मंगलवार को ईरान ने अपने अर्धसैनिक बल 'बसिज' के प्रमुख गुलामरेजा सुलेमानी के मारे जाने की भी पुष्टि की थी। ईरान ने इसे "अमेरिकी-जायोनी दुश्मन द्वारा किया गया एक आतंकवादी हमला" करार दिया है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर के अनुसार, लारीजानी और सुलेमानी दोनों का अंतिम संस्कार बुधवार को किया जाएगा।
ईरान की समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने लारीजानी के निधन पर "गहरा दुख और खेद" व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उनमें परोपकार, अंतर्दृष्टि, साथ और दूरदर्शिता के अलावा कुछ नहीं देखा और निस्संदेह इस क्षति की भरपाई करना बहुत कठिन है।
यह युद्ध अब तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ती जा रही है।
