लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: रविशंकर प्रसाद का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- 'किसी' के अहंकार को खुश करने का खेल
नई दिल्लीः भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष द्वारा लाया गया प्रस्ताव उनके खिलाफ अविश्वास के लिए नहीं, बल्कि 'किसी' के अहंकार की संतुष्टि के लिए लाया गया है। विपक्ष द्वारा बिरला के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए प्रसाद ने कहा, ''लोकसभा अध्यक्ष के पद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को किसी के अहंकार की संतुष्टि का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।''
कांग्रेस नेता मोहम्मद जावेद ने मंगलवार को संकल्प प्रस्तुत किया था और सदन में इस पर चर्चा शुरू हुई। प्रसाद ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा, ''यह प्रस्ताव बिरला के खिलाफ अविश्वास के लिए नहीं, बल्कि किसी के अहं की संतुष्टि के लिए लाया गया है।''
उन्होंने कहा कि संसदीय प्रणाली पर 'कॉल और शकधर' की लिखी किताब में कहा गया है कि नेता प्रतिपक्ष छाया प्रधानमंत्री की तरह हैं, लेकिन इसमें यह भी लिखा है कि उन्हें राष्ट्रहित के मुद्दों पर अपने शब्दों का ध्यान से चयन करना चाहिए। प्रसाद ने कहा कि इसमें कहा गया है कि नेता प्रतिपक्ष संसद के अंदर और बाहर सरकार की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन विदेश की धरती पर उन्हें दलीय राजनीति नहीं करनी चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) राहुल गांधी को इसे पढ़ना चाहिए। इस पर कांग्रेस सदस्यों ने टीका-टिप्पणी की और आसन के समीप आ गए। बाद में राहुल गांधी को बोलने की अनुमति मिलने पर हंगामा शांत हुआ।
प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी ने बजट सत्र के पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए एक पूर्व सेना प्रमुख के संस्मरण को लेकर कुछ बातें कही थीं। प्रसाद ने कहा कि उन्हें बार-बार बताया गया कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है फिर भी अपनी बात पर अड़े रहे।
उन्होंने कहा कि बाद में प्रकाशक ने आधिकारिक बयान जारी किया कि यह पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है और इसका उपयोग करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा सांसद ने कहा, ''फिर यह बात समझ में नहीं आई कि यह अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाया गया। जब किताब छपी नहीं, तो वह उसे अधिप्रमाणित कैसे कर सकते हैं।'' उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी, राजीव गांधी से लेकर सोनिया गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज तक सदन में इतने नेता एलओपी की भूमिका में रहे हैं और उनकी परंपराओं को देखा जाना चाहिए।
प्रसाद ने कहा, ''निश्वित रूप से एलओपी इस सदन का हिस्सा होते हैं लेकिन इस पद की गरिमा जरूरी है।'' उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जहां भी विदेश में गए उन्होंने संविधान, सरकार और निर्वाचन आयोग का मखौल उड़ाया। प्रसाद ने कहा, ''एलओपी का आचरण क्या ऐसा होना चाहिए। रिकॉर्ड में उनकी ऐसी अनेक टिप्पणियां हैं जिन पर आश्चर्य होता है।'' उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस और विशेष रूप से नेता प्रतिपक्ष संसद में अराजकता की स्थिति पैदा करना चाहते हैं। प्रसाद ने कहा, ''आज यह बेबुनियाद और प्रायोजित प्रस्ताव लाया गया है इसका हम पूरा विरोध करते हैं।''
