‘Yes Means Yes’ पूरे यूरोप में बदलेगी बलात्कार की परिभाषा, यूरोपीय संसद में महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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स्ट्रासबर्ग/ब्रसेल्स। यूरोपीय संसद के सांसदों ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए मांग की है कि पूरे यूरोपीय संघ में बलात्कार की एक जैसी परिभाषा लागू होनी चाहिए। सांसदों का कहना है कि बलात्कार के मामलों में केवल शारीरिक हिंसा या बल प्रयोग को ही आधार न माना जाए, बल्कि 'सहमति' के अभाव को मुख्य आधार बनाया जाए।

संसद में भारी बहुमत से पास हुई इस रिपोर्ट में मांग की गई है कि सभी सदस्य देश अपने पुराने कानूनों को बदलें। सांसदों ने साफ कर दिया है कि सहमति का मतलब केवल 'हाँ' होना चाहिए। 

अगर कोई महिला चुप है, विरोध नहीं कर पा रही है या उसने साफ तौर पर 'ना' नहीं कहा है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उसकी सहमति थी। यहाँ तक कि पुराने रिश्तों या पहले दी गई किसी सहमति को भी मौजूदा मामले में आधार नहीं बनाया जा सकता।

सांसदों का तर्क है कि कई बार डर, नशे, बेहोशी या किसी मजबूरी की वजह से पीड़ित विरोध करने की स्थिति में नहीं होता। कभी-कभी सदमे की वजह से शरीर सुन्न पड़ जाता है, जिसे कानून और अदालतों को समझना होगा। संसद चाहती है कि पीड़ितों को तुरंत डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक मदद और कानूनी सलाह मिले। 

इसके लिए हर वक्त खुले रहने वाले सहायता बनाने की बात भी कही गई है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुलिस, जज और वकीलों को खास ट्रेनिंग दी जानी चाहिए ताकि वे पीड़ितों के साथ संवेदनशीलता से पेश आएं। इसके अलावा, स्कूलों में यौन शिक्षा के लिए नए दिशानिर्देश जारी करने और इंटरनेट पर फैलने वाले गलत विचारों के खिलाफ अभियान चलाने का सुझाव दिया गया है। 

संसद की रिपोर्टर इविन इंसिर ने कहा कि यह गलत है कि यूरोप के कई हिस्सों में अब भी महिलाएं 'सिर्फ हाँ का मतलब हाँ' वाले कानून के दायरे में नहीं आती हैं। वहीं, जोआना शेउरिंग-विल्गस ने बताया कि यूरोपीय संघ में हर तीन में से एक महिला हिंसा का शिकार होती है। उन्होंने जोर दिया कि अब पुराने कानूनों को पीछे छोड़कर महिलाओं को हर जगह एक जैसी सुरक्षा देने का समय आ गया है। 

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