होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 20,000 नाविक, जहाजों की नाकाबंदी से दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग बाधित 

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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दुबई। होर्मुज जलडमरूमध्य को पार न कर पाने के कारण सैकड़ों जहाजों पर सवार लगभग 20,000 नाविक खाड़ी में फंसे हुए हैं। इन जहाजों में गैस और तेल के टैंकर सहित कई मालवाहक जहाज शामिल हैं। दुनिया के कुल तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है।

समुद्र संबंधी डेटा देने कंपनी 'लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस' के अनुसार, 13 से 19 अप्रैल के दौरान इस जलडमरूमध्य से लगभग 80 जहाज गुजरे। युद्ध से पहले इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग 130 या उससे अधिक जहाज गुजरते थे। 

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक दर्जनों जहाजों पर हुए हमलों में कम से कम 10 नाविकों की मौत हो चुकी है। पिछले हफ़्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया था। इसके बावजूद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रखी। जवाब में, ईरान ने स्ट्रेट में जहाज़ों पर गोलीबारी की और दो जहाज़ों पर कब्ज़ा कर लिया। 

वहीं, 'स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में सैन्य खर्च 2025 में स्थिर हो गया जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में यह बढ़ गया। इसके अनुसार, पूरे क्षेत्र के सैन्य खर्च में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है लेकिन इजरायल और ईरान दोनों के खर्च में वास्तव में गिरावट आई है। वर्ष 2025 में इजरायल का सैन्य खर्च 4.9 प्रतिशत घटकर 48.3 अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट साल 2024 के मुकाबले युद्ध की तीव्रता में आई कमी को दर्शाती है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, खर्च में यह कमी मुख्य रूप से नवंबर 2024 में लेबनान और अक्टूबर 2025 में गाजा में हुए युद्धविराम समझौतों के चलते आई है। हालांकि, बड़े पैमाने पर सैन्य अभियानों के थमने के बावजूद इजरायल ने दोनों क्षेत्रों में अपनी जमीनी मौजूदगी और 'सटीक हमलों' का सिलसिला जारी रखा है। वहीं, ईरान का खर्च 5.6 प्रतिशत घटकर 7.4 अरब डॉलर हो गया। इसका कारण मुद्रास्फीति और व्यापक आर्थिक दबाव बताया है।

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