एंडोफाइटिक बैक्टीरिया पौधों की वृद्धि और औषधीय गुणों के असली हीरो: CSIR-CIMAP के रिसर्च में हुआ असली खुलासा
लखनऊ, अमृत विचार : औषधीय पौधों की गुणवत्ता बढ़ाने और उन्हें पूरी तरह प्राकृतिक रूप से विकसित करने को लेकर सीएसआईआर-सीमैप की शोधार्थी डॉ. आकांक्षा सिंह के नेतृत्व में महत्वपूर्ण शोध किया गया है। इस शोध में एंडोफाइटिक बैक्टीरिया की भूमिका को प्रमुख रूप से सामने लाया गया है, जो पौधों में औषधीय गुणों के विकास और वृद्धि में सहायक होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन बैक्टीरिया को बढ़ाकर पौधों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को बेहतर किया जा सकता है।
शोध के दौरान औषधीय पौधे एंड्रोग्रैफिस पैनिकुलाटा (कालमेघ) से प्राप्त एंडोफाइटिक बैक्टीरिया माइक्रोकोकस के जीनोम का पहली बार विस्तृत विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि माइक्रोकोकस लूटियस एएसडी6 का जीनोम लगभग 2.36 मेगाबेस का है, जिसमें 73 प्रतिशत जीसी कंटेंट मौजूद है। वैज्ञानिकों ने 2,290 प्रोटीन-कोडिंग जीनों की पहचान की, जिनमें से अधिकांश पौधों की वृद्धि और विकास से जुड़े हैं। इन जीनों में फॉस्फेट घुलनशीलता, नाइट्रोजन स्थिरीकरण और इंडोल-3-एसिटिक एसिड, साइडरोफोर्स तथा एसीसी डिअमिनेज जैसे फाइटोहॉर्मोन के उत्पादन से जुड़े जीन शामिल हैं।
शोध में यह भी पाया गया कि इस बैक्टीरिया में रिएक्टिव ऑक्सीजन प्रजातियों को नियंत्रित करने वाले एंजाइम, हीट शॉक और कोल्ड शॉक प्रोटीन से संबंधित जीन मौजूद हैं, जो इसे विपरीत परिस्थितियों में जीवित रहने में सक्षम बनाते हैं। इससे पौधों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलता है।
डॉ. आकांक्षा सिंह के अनुसार, सिक्किम को आर्गेनिक स्टेट घोषित किया गया है, जहां खेती में कीटनाशकों का उपयोग नहीं होता। कीटनाशकों के प्रयोग से लाभदायक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे पौधों की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित होता है।
