ग्रामीण परिवेश के मेले से लौटी अयोध्या की पुरानी रौनक, 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे रामनगरी
विशाल तिवारी/ अयोध्या, अमृत विचार। रामनवमी मेले ग्रामीण परिवेश से आए कई लाख श्रद्धालुओं से रामपथ ही नहीं गली-कूंचें भी भरे रहे। सिर पर गठरी रखे, बच्चों व बूढ़ों की अंगुलियां पकड़कर चल रहे श्रद्धालुओं को जहां जगह मिली, वहीं खाना पकाया, पन्नी बिछाकर आराम किया, फिर आगे बढ़ चले। आम लोगों का कहना है कि पुरानी अयोध्या के मेले की रौनक एक बार फिर लौट आई है। इसकी कमी दो वर्षों से खल रही थी।
एक अनुमान के मुताबिक इस वर्ष रामनवमी मेले में 20 लाख से ज्यादा श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। मुख्य पर्व पर ही 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालु अयोध्या में मौजूद रहे। इनमें 80 प्रतिशत श्रद्धालु आसपास के जिलों के ग्रामीण इलाके के रहे। इससे रामपथ, धर्मपथ, अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन, राम की पैड़ी, तुलसी उद्यान, बिरला धर्मशाला समेत मठ मंदिर, शहर की गलियों, चौक-चौराहों पर खूब चहल पहल नजर आई।
ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालु गुरुवार शाम से ही परिवार व गांव के लोगों के साथ ग्रुप में अयोध्या पहुंचने लगे थे। कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली से तो कोई शेयरिंग वाहन से पहुंचा। आज शुक्रवार सुबह सरयू स्नान के बाद मठ मंदिरों में दर्शन पूजन किया। श्रीराम जन्म के बाद अपने अपने घरों को रवाना भी हो गए।
अयोध्या निवासी बुजुर्ग सरोज सिंह कहते हैं कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अयोध्या में देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। हालांकि ग्रामीण परिवेश के श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई थी, जिससे अयोध्या के सौंदर्य में कुछ कमी महसूस हो रही थी। इस बार यह कमी दूर हो गई। संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत रामस्वरूप दास बताते हैं कि इस बार इनकी संख्या में वृद्धि होने से खुशी हो रही है।
खूब बिके प्रसाद व पूजन सामग्री, छोटे जलपान की दुकानों पर दिखी भीड़
भारी भीड़ के चलते प्रसाद के साथ पूजन सामग्री व सौंदर्य प्रसाधन के सामानों की खूब बिक्री हुई। छोटे जलपान की दुकान जैसे चाय, समोसा, जलेबी, पूरी-सब्जी, चाट आदि की दुकानों पर खूब भीड़ दिखी। ठंडा शरबत व गन्ने के जूस भी खूब बिके। हालांकि बड़े रेस्टारेंट आदि में कुछ खास भीड़ नजर नहीं आई। प्रसाद विक्रेता केशरीनंदन गुप्ता ने बताया कि मेले में ग्रामीण भक्तों ने खूब प्रसाद खरीदा। सभी दुकानों पर सुबह से ही रेला लगा रहा।
ठेले पर पूजन सामग्री की दुकान लगाने वाले संजय तिवारी ने बताया कि फूलों के हार, चंदन, अगरबत्ती, दीये और राम-सीता की तस्वीरें भी खूब बिकी। अन्य दुकानदारों का कहना है कि रामलला की प्राण पतिष्ठा के बाद से पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आमद बढ़ने से व्यापार में जान आई है।
