IAS Rinku Singh Rahi : पीसीएस अफसर बनकर 100 करोड़ का घोटाला खोला, सात गोलियां खाईं और अब आईएएस बनने के बाद नौकरी से दे दिया इस्तीफा
शाहजहांपुर में वकीलों के सामने उठा-बैठक लगाने के बाद एसडीएम पद से हटाए गए थे आईएएस रिंकू सिंह राही-अभी राजस्व परिषद से थे संबद्ध
लखनऊ, अमृत विचार : आईएएस रिंकू सिंह राही ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। रिंकू सिंह ने मुजफ्फरनगर का जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए 100 करोड़ की स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति) का घोटाला उजागर किया था। बदमाशों ने उन्हें सात गोलियां मारी थीं। महीनों अस्पताल में भर्ती रहे। जैसे-तैसे रिंकू सिंह की जान बचई। चेहरा बिगड़ गया। एक आंख की रोशनी चल गई। कान से सुनाई देना बंद हो गया। इस सबके बावजूद उन्होंने नौकरी का अपना अंदाज नहीं बदला। वर्ष 2022 में आईएएस बन गए। अब उन्होंने कोई जिम्मेदारी नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए आह्त होकर इस्तीफा दे दिया।
कौन हैं रिंकू सिंह राही?
हाथरस के गांव में आटा-चक्की चलाने वाले के बेटे रिंकू सिंह राही के पीसीएस से लेकर आईएएस बनने तक के सफर पर नजर.
रिंकू सिंह राही दलित समुदाय से आते हैं। 20 मई 1982 को हाथरस में पैदा हुए। आर्थिक हालत बहुत अच्छी नहीं थी। पिता आटा-चक्की चलाते थे। सरकारी विद्यालय से शुरुआती पढ़ाई की। इंटरमीडिएट में अच्छे नंबर आए। स्कॉलरशिप पर टाटा इंस्टीट्यूट में बीटेक में एडमिशन मिल गया। इंजीनियरिंग के बाद साल 2004 में यूपी-पीसीएस परीक्षा पास की। समाज कल्याण अधिकारी बन गए।
सौ करोड़ का घोटाला और सात गोलियां...
मुजफ्फरनगर में 100 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले ने प्रदेश में हलचल मचा दी थी। मामला वर्ष 2009 का है। रिंकू सिंह राही समाज कल्याण अधिकारी थे। यहां फर्जी बैंक खातों के जरिये छात्रवृत्ति निकाली जा रही थी। उन्होंने ही ये घोटाला उजागर किया। हालांकि रिंकू सिंह को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। एक दिन जब वह बैडमिंटन खेल रहे थे। दो हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। रिंकू सिंह को 7 गोलियां लगीं। खून से लथपथ रिंकू को मेरठ के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। करीब महीना भर तक मौत-जिंदगी से जूझते रहे। आखिर जान तो बच गई। लेकिन इस हमले में उन्हें एक आंख गंवानी पड़ गई। चेहरा बिगड़ गया और एक खान से सुनाई देना बंद हो गया।
लेकिन रिंकू सिंह राही ने हिम्मत नहीं हारी। उस घटना के जख्मों को सुखाकर यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। वर्ष 2022 में उन्होंने दिव्यांग कोटे से यूपीएससी क्वालिफाई कर लिया और आईएएस बन गए। जुलाई 2025 में मथुरा में एसडीएम रहे। मथुरा से शाहजहांपुर का एसडीएम बनाकर भेजा गया। लेकिन यहां एक नए विवाद में घिर गए। वकील का एक मुंशी खुले में पेशा कर रहा था। उसे उठा-बैठक लगवाने के आरोपों में घिरे रिंकू सिंह के खिलाफ वकीलों ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने शांत करते हुए रिंकू सिंह वकीलों के सामने ही कान-पकड़कर उठा-बैठक लगाने लग गए। इस वीडियो के वायरल होने के बाद शासन ने रिंकू सिंह को शाहजहांपुर के एसडीएम पद से हटाकर राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया था। तब से रिंकू सिंह परिषद से ही अटैच हैं।
उनका आरोप है कि उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है। वेतन तो मिल रहा है, लेकिन सेवा का मौका नहीं। इसी से आह्त होकर उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। अपने पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें काम करने का अवसर नहीं दिया गया और "संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग सिस्टम" चल रहा है।
