कानपुर : मिश्री मठ के परमाध्यक्ष करौली शंकर महादेव बने महामंडलेश्वर, भव्य उत्सव में हुआ पट्टाभिषेक

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Published By Deepak Mishra
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श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण हरिद्वार में वैदिक रीति से भव्य उत्सव में हुआ पट्टाभिषेक

कानपुर, अमृत विचार। श्री करौली शंकर महादेव धाम, मिश्री मठ के परमाध्यक्ष करौली शंकर महादेव महाराज का मंगलवार को हरिद्वार में वैदिक पद्धति और परंपरा से पट्टाभिषेक समारोह आयोजित कर महामंडलेश्वर की उपाधि से अलंकृत किया गया। श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण में आयोजित भव्य समारोह के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियों से पूरा वातावरण सनातन की आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।

श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण के मुखिया महंत भगतराम जी महाराज ने पट्टाभिषेक समारोह में कहा कि करौली शंकर महादेव योग, मंत्र दीक्षा, ध्यान साधना व भारतीय संस्कृति के संवाहक हैं। वह देश-दुनिया में मानव मात्र को कष्टों से मुक्ति दिलाने का भागीरथ कार्य कर रहे हैं। अब अखाड़ा की परम्पराओं का पालन करते हुए मान-मर्यादा व सम्मान को और आगे बढ़ाएंगे।  

सचिव मुखिया महंत जगतार मुनि जी ने कहा कि महामण्डलेश्वर के रूप में करौली शंकर महादेव श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण की गौरवशाली परम्परा को आगे बढ़ाएंगे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष, महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविन्द्र पुरी जी महाराज ने कहा कि करौली शंकर महादेव महाराज विलक्षण संत हैं।

श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा श्री महंत ज्ञानदेव सिंह जी महाराज ने कहा कि करौली शंकर महादेव उच्च कोटि के साधक हैं। नया अखाड़ा ने उन्हें महामण्डलेश्वर बनाकर संत समाज को नयी ऊर्जा व शक्ति प्रदान की है। समारोह में उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि पट्टाभिषेक समारोह में उमड़ा संतों व भक्तों का सैलाब इस बात का प्रमाण है कि करौली शंकर महादेव हमारी आस्था के केन्द्र हैं। संचालन महामण्डेलश्वर स्वामी हरिचेतनानन्द जी महाराज ने किया।

पट्टाभिषेक समारोह में मुखिया महंत आकाश मुनि, मुखिया महंत मंगलदास, अध्यक्ष महंत धूनी दास महाराज, अध्यक्ष महंत गोपाल दास जी महाराज शामिल रहे। समारोह में श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन से कोठारी राघवेंद्र दास, श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा के श्री महंत ज्ञानदेव सिंह, महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद बड़ा उदासीन अखाड़ा, महामंडलेश्वर रूपेन्द्र प्रकाश, महामंडलेश्वर चंद्र मुनि, महामंडलेश्वर योगेंद्रानंद, उपस्थित रहे।

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