वेस्ट यूपी की बिजली सेवा ने किया कमाल... हरियाणा, असम और आंध्र प्रदेश को भी पीछे छोड़ा, केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने जारी की रेटिंग
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश के बिजली विभाग की सेवाओं के बारे में शायद ही कोई संतुष्ट हो, लेकिन केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा विद्युत उपभोक्ता सेवा को लेकर जो रेटिंग जारी की गई है, उसमें पश्चिमांचल निगम प्रदेश भर में टाप पर है। खास बात यह है कि विकसित राज्य माने जाने वाले हरियाणा, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश से भी बेहतर रेटिंग आई है। इससे बिजली कर्मचारियों मे खासा उत्साह है।
केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा रेटिंग के मुताबिक यूपी पावर कारपोरेशन के पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की रेटिंग 86.57 ए प्लस है। जबकि बीते साल 57.51 क रेटिंग थी। जाहिर है कि एक साल में बिजली उपभोक्ता सेवा के मामले में खासा बेहतर कार्य किया गया। जबकि रिकार्ड गवाह है कि हरियाणा जैसा विकसित राज्य भी पश्चिमांचल वितरण निगम से पीछे है। हरियाणा की 74.44, मध्य प्रदेश की 71.85, असम की 80.99, छत्तीसगढ़ की 70.40, आंध्र प्रदेश की रेटिंग 65.00 दर्ज की गई है।
इसी तरह दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने भी अपनी सेवाओं में काफी प्रयास किया है। पहले जहां रेटिंग 11.23 थी, जो कि बढ़कर 45.04 हो गई है। वितरण निगम की हानियां घटकर 15.51 फीसदी रह गई हैं, जो राष्ट्रीय मानक के लगभग बराबर है। वहीं कलेक्शन एफिशिएंसी 95 फीसदी दर्ज की गई है, जो निगम के वित्तीय अनुशासन और कार्यक्षमता को दर्शाती है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का स्कोर 18.76 से बढ़कर 29.38 हो गया है। रेटिंग माइनस-सी से सुधरकर सी हो गई है। इसकी वितरण हानियां भी घटकर 15.96 फीसदी रह गई हैं, जो राष्ट्रीय मानक के बेहद करीब हैं।
निजीकरण का फैसला वापस लिया जाए: शैलेन्द्र दुबे
प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि ताजा रेटिंग में पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसलिए अब सरकार को निजीकरण का फैसला वापस लेना चाहिए। जब दोनों निगमों की कार्यक्षमता लगातार बेहतर हो रही है, तो निजीकरण का कोई औचित्य शेष नहीं रह जाता। ऐसा होने पर विभाग के कर्मचारी दोगुनी ऊर्जा से काम करेंगे।
