Bareilly: नन्हे तन्मय ने कैसे पकड़ी साइबर ठगों की चालाकी, जानकर हैरान हो जाएंगे
बरेली, अमृत विचार। डिजीटल अरेस्टिंग करने वाले साइबर ठगों ने डॉक्टर, इंजीनियर, समेत कई पढ़े लिखे लोगों को अपने जाल में फंसकर करोड़ों की ठगी कर ली। लेकिन आठवीं कक्षा के छात्र ने उनकी नाक में नकेल कश दिया। व्हाट्एप कॉल पर बात करते करते उसने ठगों के पीछे लिखे दीवार पर लिखे एनआईए के स्लोगन में कुछ गलत लगा। जब छात्र ने दूसरे मोबाइल पर एनआईए का लोगों देखा तो उसे पता चल गया कि यह ठगों की कॉल है।
इसके साथ ही साइबर ठग आपस में जनाब जनाब कहकर बात कर रहे थे। यह सुनकर उसे लगा की यह पाकिस्तान के लोग है, और फोन काट दिया। नौ घंटे की डिजीटल अरेस्टिंग के बाद परिवार थाने पहुंचा और सारी बात पुलिस को बताई।बरेली के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के सुर्खा इलाके की है। सुर्खा इलाके के रहने वाले संजय कुमार, जो एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया और गंभीर आरोप लगाते हुए बातचीत शुरू की. साइबर ठगों ने संजय और उनकी पत्नि दोनों को ही डिजिटल अरेस्ट कर लिया। यह देखकर उनके बेटे तन्यम की सूझबुझ ने ठगों को समझ लिया और पुलिस को इसकी जानकारी दी। जिसके बाद परिवार ठगी का शिकार होने से बच गया।
शुक्रवार को एडीजी रमित शर्मा, एसएसपी अनुराग आर्य, एसपी सिटी मानुष पारिक ने तन्यम को एडीजी कार्यालय में सम्मानित किया और उनके माता-पिता से भी बातचीत की। तन्मय ने सारी बात पुलिस अफसरों को बताई। उसने बताया कि अखबार, टीवी और सोशल मीडिया से उसे साइबर ठगी के बारे में बहुत कुछ जानकारी थी। वह बार बार अपने पिता से फोन को काटने की बात कह रहा था लेकिन पिता इतने डर गए कि वह फोन नहीं काट सके। तन्मय ने बताया कि वह बड़ा होकर क्रिकेटर बनना चाहता है। लेकिन पुलिस अफसरों ने उसे बताया कि जिस तरीके काम उसने किया है। उससे वह एक अच्छा पुलिस अफसर बनकर देश प्रदेश की सेवा कर सकता है।
पांच मिनट तक तन्मय की बात सुनते रहे अफसर
तन्मय ने जब अपनी बात पुलिस को बताना शुरू किया तो वहां पर सन्नाटा पसर गया। सारे अफसर मासूम तन्मय को सुनते रहे। उसने अपनी उम्र से बड़ा काम किया। वह एक तरफ साइबर ठगों से बात भी करता रहा और दूसरी तरफ वह उनके बारे में गूगल से रिसर्च भी करता रहा।
बोला फर्जी था वारंट लेटर
तन्मय ने पुलिस अफसरों को बताया कि साइबर ठगों ने उसे जो वारंट दिखाया था। वह पूरी तरह फर्जी था। उसने नेट पर चेक किया तो पता चला की वारंट में कोर्ट की मोहर लगी होती है। जबकि उस वारंट में कोई मोहर नहीं लगी थी।
एडीजी जोन रमित शर्मा ने बताया कि तन्मय ने जो काम किया है वह बहुत की सराहनीय है। बच्चों को साइबर ठगी की जानकारी होनी चाहिए। इस जानकारी से परिवारों के साथ ठगी होने से रोका जा सकता है। बच्चों की जागरूकता उन्हें मजबूत बनाती है।
