हर बच्चा नंबरों से नहीं : अपने हुनर से बनता है बड़ा

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Published By Virendra Pandey
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बोर्ड परीक्षा के परिणाम आने वाले हैं। तारीख करीब आते ही हजारों घरों में बेचैनी बढ़ने लगती है। कहीं विद्यार्थी देर रात तक जागकर अपने अनुमान लगा रहा है, तो कहीं माता-पिता चुपचाप उसके चेहरे की चिंता पढ़ रहे हैं। किसी को अच्छे अंकों की उम्मीद है, किसी को डर कि मेहनत के बाद भी परिणाम मनचाहा न आए। परिणाम के दिन मोबाइल की घंटी, वेबसाइट का खुलना, रोल नंबर डालती कांपती उंगलियां-सब उस पल को और भारी कर देते हैं और जब स्क्रीन पर अंक उम्मीद से कम दिखें या असफलता सामने खड़ी मिले, तो लगता है मानो सब समाप्त हो गया। विद्यार्थी को भविष्य अंधेरा दिखने लगता है, अभिभावक चिंता और अपराधबोध से भर उठते हैं, लेकिन इसी क्षण सबसे जरूरी है यह याद रखना कि यह केवल एक परीक्षा है, पूरा जीवन नहीं। एक परिणाम आपके व्यक्तित्व, क्षमता और भविष्य का अंतिम निर्णय नहीं हो सकता।

असफलता का अर्थ अयोग्यता नहीं

विद्यार्थियों को यह समझना होगा कि असफलता का अर्थ अयोग्यता नहीं होता। कई बार कम अंकों के पीछे अनेक कारण होते हैं-तनाव, समय प्रबंधन की कमी, सही रणनीति का अभाव, स्वास्थ्य की समस्या या किसी विषय में कमजोरी। इसलिए स्वयं को “मैं किसी काम का नहीं” कहकर दोषी ठहराने के बजाय अपनी तैयारी का ईमानदारी से विश्लेषण करें। सोचें, कमी कहां रह गई और अगली बार क्या बदला जा सकता है। यदि कोई विषय कठिन लगा, तो उसका अधिक अभ्यास करें। यदि समय कम पड़ा, तो समय बांटने की आदत डालें। यदि तनाव ने असर डाला, तो पढ़ाई के साथ विश्राम, व्यायाम और ध्यान को भी जीवन का हिस्सा बनाइए। हर गलती अगली सफलता का रास्ता दिखाती है।

असफल के बाद भी अनेक रास्ते

असफल परिणाम के बाद आगे बढ़ने के अनेक रास्ते होते हैं। यदि किसी विषय में कम अंक आए हैं, तो कंपार्टमेंट या सुधार परीक्षा दी जा सकती है। यदि पूरी परीक्षा में सफलता नहीं मिली, तो अगले वर्ष बेहतर तैयारी के साथ फिर प्रयास किया जा सकता है। आज शिक्षा की दुनिया पहले से कहीं अधिक खुली है। केवल एक धारा या एक करियर ही जीवन का अंतिम रास्ता नहीं है। विज्ञान, वाणिज्य और कला के अलावा भी अनेक विकल्प हैं-डिजिटल मार्केटिंग, डिजाइन, होटल प्रबंधन, एनीमेशन, खेल, संगीत, कंप्यूटर, फोटोग्राफी, फैशन, आईटीआई, डिप्लोमा, उद्यमिता और कई कौशल आधारित क्षेत्र। कई बार एक असफलता हमें उसी दिशा में मोड़ देती है, जहां हमारी वास्तविक प्रतिभा छिपी होती है।

असफलता का अर्थ यह नहीं कि आगे सफलता नहीं

जब सब कुछ बिखरा हुआ लगे, तब केवल एक बात याद रखिए-बोर्ड परीक्षा जीवन की पूरी कहानी नहीं, उसका केवल एक छोटा-सा अध्याय है। यदि आज असफलता मिली है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि कल सफलता नहीं मिलेगी। यह समय स्वयं को समाप्त मान लेने का नहीं, बल्कि नए ढंग से फिर शुरू करने का है। अभिभावक धैर्य रखें और विद्यार्थी हिम्मत बनाए रखे, तो यह कठिन दौर भी बीत जाएगा। आज का दुख कल की ताकत बन सकता है, आज की हार कल की सबसे बड़ी सीख। गिरना गलत नहीं है, गिरकर वहीं रुक जाना गलत है। इसलिए उठिए, स्वयं पर विश्वास रखिए और आगे बढ़िए, क्योंकि जीवन अब भी आपके सामने पूरी रोशनी के साथ खड़ा है।

बच्चों की रुचियों को समझे

अभिभावकों को चाहिए कि वे इस समय बच्चे की रुचियों को समझने की कोशिश करें। हर बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर या सरकारी अधिकारी बनने के लिए नहीं बना होता। कोई चित्रकला में अच्छा होता है, कोई खेल में, कोई लेखन में, तो कोई तकनीक या व्यवसाय में। यदि बच्चा किसी अलग क्षेत्र में रुचि दिखाता है, तो उसे कमजोरी नहीं, संभावना समझें। आवश्यकता हो तो करियर काउंसलर, शिक्षक या अनुभवी व्यक्ति की सहायता लें। कई लोग स्कूल या बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक नहीं ला पाए, लेकिन बाद में अपनी लगन और कौशल के बल पर बड़ी सफलता तक पहुंचे। इसलिए बच्चे को यह महसूस कराइए कि उसका भविष्य अब भी सुरक्षित है और उसके सपनों के लिए घर का दरवाजा आज भी खुला है।

अकेलेपन से बचना बचें 

विद्यार्थियों को इस समय अकेलेपन से बचना चाहिए। अक्सर असफलता के बाद वे मित्रों, रिश्तेदारों और दुनिया से दूर होने लगते हैं। उन्हें लगता है कि लोग उनका मजाक उड़ाएंगे या उन्हें कम समझेंगे, लेकिन सच यह है कि जो लोग सचमुच अपने होते हैं, वे साथ खड़े रहते हैं। अपने किसी भरोसेमंद मित्र, शिक्षक, भाई-बहन या माता-पिता से खुलकर बात कीजिए। मन का बोझ भीतर मत रखिए। साथ ही, सोशल मीडिया और दूसरों की सफलता देखकर स्वयं को कम मत आंकिए। हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है। कुछ लोग जल्दी सफल होते हैं, कुछ देर से, लेकिन आगे वही बढ़ते हैं, जो हार के बाद भी चलना नहीं छोड़ते।

कृति आरके जैन, लेखिका

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