UP Education News: नेशनल पीजी कॉलेज में बीबीए के दो नए पाठ्यक्रम होंगे शुरू, महाविद्यालय की विद्या परिषद की बैठक हुई आयोजित

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Published By Muskan Dixit
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बीए एलएलबी, बी.कॉम. एलएलबी, एम.एससी. डेटा साइंस एवं डेटा एनालिटिक्स पाठ्यक्रम भी किए जाएंगे आरंभ

लखनऊ, अमृत विचार : नेशनल पी.जी. कॉलेज में अगले सत्र से बीबीए के दो नए पाठ्यक्रम सहित कई आधुनिक और व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। महाविद्यालय में 34वीं अकादमिक काउंसिल (विद्या परिषद) की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह ने की। इस दौरान कॉलेज की शैक्षणिक एवं संस्थागत प्रगति से जुड़े बिंदुओं पर विचार-विमर्श करते हुए कई अहम फैसले लिए गए। विद्या परिषद की बैठक में अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम प्रस्तावित किए गए, जिनमें बीबीए (लॉजिस्टिक्स) एवं बी.एससी. (डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स) शामिल हैं।

पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा तथा सतत विकास लक्ष्य के घटकों को भी शामिल किया गया है। सभी पाठ्यक्रमों में स्वयं (SWAYAM) कोर्स जोड़े गए हैं। साथ ही विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों को प्रवेश परामर्श सेवाएं भी प्रदान की जा रही हैं।

शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए मुख्य एवं लघु शोध परियोजनाओं हेतु कुल 15 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। बैठक के दौरान कुलपति नामित सदस्य द्वारा नए पाठ्यक्रमों के प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए गए, जिनमें बीए एलएलबी, बी.कॉम. एलएलबी, एम.एससी. डेटा साइंस एवं डेटा एनालिटिक्स जैसे रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम शामिल हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि नए पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले उनकी व्यवहार्यता का गहन अध्ययन किया जाए।

एमए इतिहास की शुरुआत एवं विभागीय विस्तार पर रिपोर्ट

इतिहास विभाग ने विद्यार्थियों की बढ़ती मांग के अनुरूप एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल की जानकारी दी। इतिहास विषय में दो वर्षीय परास्नातक (एमए) कार्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव को 16 फरवरी को आयोजित बोर्ड ऑफ स्टडीज़ की बैठक में मंजूरी दी गई, जिसके बाद 13 अप्रैल को आयोजित अकादमिक काउंसिल की बैठक में इसे स्वीकृति प्रदान की गई। प्रस्तावित कार्यक्रम को उद्योगोन्मुख एवं भविष्य-केंद्रित पाठ्यक्रम के रूप में तैयार किया गया है।

कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताओं में इतिहास में जीआईएस एवं रिमोट सेंसिंग, पुरातत्व एवं शहरी अध्ययन में जियोस्पेशियल मैपिंग एवं सैटेलाइट आधारित विश्लेषण का प्रशिक्षण शामिल है। इसके अलावा अभिलेख प्रबंधन, संग्रहालय विज्ञान एवं विरासत पर्यटन जैसे उद्योगोन्मुख कौशल मॉड्यूल भी जोड़े गए हैं, जो रोजगार क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित हैं। डिजिटल एवं दृश्य अभिलेखीकरण के तहत पेंटिंग्स एवं फोटोग्राफ जैसे स्रोतों पर व्यावहारिक कार्य कराया जाएगा, जबकि पर्यावरणीय इतिहास के माध्यम से ऐतिहासिक विकास को वर्तमान जलवायु और सततता के मुद्दों से जोड़ा जाएगा।

बैठक में यह रहे उपस्थित

बैठक में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षाविदों की उपस्थिति रही, जिनमें कुलपति नामित सदस्य के रूप में प्रो. सी.बी. शर्मा (कुलपति, विनोबा भावे विश्वविद्यालय), प्रो. विग्नेश कुमार (मेरठ विश्वविद्यालय), पद्मश्री प्रो. अनिल रस्तोगी (सीडीआरआई), प्रो. उषा किरण राय एवं प्रो. उमेश सिंह (बीएचयू) प्रमुख रूप से शामिल रहे।

आईक्यूएसी का पुनर्गठन, नए पाठ्यक्रमों की तैयारी

शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बी.कॉम. पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। साथ ही पीजी स्तर पर इतिहास विषय शुरू करने तथा एमए (इतिहास) कार्यक्रम का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर हुई परिचर्चा

नेताजी सुभाष चंद्र बोस राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में इग्नू क्षेत्रीय केंद्र के साथ संयुक्त रूप से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में इग्नू के वरिष्ठ निदेशक डॉ. अनिल कुमार मिश्रा मुख्य अतिथि और निदेशक डॉ. अनामिका सिन्हा विशिष्ट अतिथि रहीं, जबकि अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. रश्मि बिश्नोई ने की।

प्रो. बिश्नोई ने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने के लिए नारी सशक्तिकरण आवश्यक है। परिचर्चा में छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। तेजस्विनी चक्रवर्ती ने अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डाला। इग्नू की छात्रा नेहा सिंह तथा महाविद्यालय की कोमल शुक्ला, साक्षी बाजपेयी, अदिति शुक्ला, रिम्सा कुरैशी और वर्षा वर्मा ने भी अपने विचार रखे।

इग्नू समन्वयक डॉ. विशाल प्रताप सिंह ने अधिनियम को विस्तार से समझाया। डॉ. अनामिका सिन्हा ने कहा कि नारी प्रतिभा और शौर्य का प्रतिबिंब है और जब नारी नीति-निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगी, तभी भारत सही मायनों में विकसित बनेगा।

कार्यक्रम में प्रो. संजय बरनवाल, डॉ. रोशनी सिंह, डॉ. हेमलता पांडे तथा डॉ. भास्कर शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि डॉ. अनिल मिश्रा ने कहा कि प्राचीनकाल से ही देश में नारी का सम्मान होता रहा है और नीतियों के निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्वेता भारद्वाज ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. भास्कर शर्मा ने किया। अंत में छात्राओं ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में मानव श्रृंखला बनाई, जिसका संयोजन ले. प्रतिमा शर्मा ने किया।

लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में कई अहम फैसले

लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान नवाचार और संस्थागत सुशासन को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

शिक्षक कल्याण से जुड़े एक अहम निर्णय के तहत स्ववित्तपोषित कार्यक्रमों में विधिवत चयन प्रक्रिया से नियुक्त शिक्षकों को यूजीसी वेतनमान के प्रवेश स्तर 57,700 रुपये पर रखने का निर्णय लिया गया। इससे शिक्षकों में समानता और प्रेरणा बढ़ने की उम्मीद है।

बैठक में बी.एससी. इन कम्प्यूटेशनल एस्ट्रोफिजिक्स नामक नए स्नातक कार्यक्रम को मंजूरी दी गई, जिससे विश्वविद्यालय देश का पहला सरकारी संस्थान बन गया है जो यह पाठ्यक्रम शुरू करेगा। इसके साथ ही तीन वर्षीय एलएलबी कार्यक्रम के छात्रों के लिए नया पदक और एक लाख रुपये की वार्षिक छात्रवृत्ति स्थापित करने को भी स्वीकृति दी गई।

अंतर्विषयक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एमएससी इन वाइल्डलाइफ साइंसेज कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया, जो किसी भी विषय से स्नातक छात्रों के लिए खुला रहेगा। साथ ही विश्वविद्यालय के सभी शैक्षणिक संस्थानों को संबंधित संकायों से औपचारिक रूप से जोड़ने का फैसला लिया गया, जिससे बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो सके।

कार्य परिषद ने एआई स्टीयरिंग समिति और संस्थागत नैतिकता समिति के गठन को भी मंजूरी दी। इन समितियों के माध्यम से शिक्षा, प्रशासन और शोध कार्यों में आधुनिक तकनीकों और नैतिक मानकों को बढ़ावा दिया जाएगा। पीएम-उषा ढांचे के तहत कार्य परिषद के दो सदस्यों को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में शामिल करने का भी निर्णय लिया गया।

ये सभी निर्णय विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक संरचना और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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