Noida Protest : नोएडा में न्यूनतम वेतन वृद्धि की घोषणा के बाद भी श्रमिकों का प्रदर्शन जारी, अब तक 300 लोग गिरफ्तार

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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नोएडा। न्यूनतम वेतन बढ़ोतरी की घोषणा के बाद भी नोएडा में श्रमिकों का आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा जहां कुछ इलाकों में पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं, जबकि कई औद्योगिक क्षेत्रों में कारखानों के बाहर धरना-प्रदर्शन किया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इससे पहले, गौतमबुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के सिलसिले में अब तक 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है और सात प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

तनावपूर्ण माहौल के बीच अधिकांश औद्योगिक इकाइयों में कामकाज ठप रहा और करीब 80 प्रतिशत उद्योगपतियों ने एहतियातन अपनी इकाइयां बंद रखीं। शहर की क्लियो काउंटी सोसाइटी के पास मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इस दौरान पुलिस पर भी हमला किया गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। सेक्टर-80 में भी प्रदर्शनकारियों का रुख उग्र रहा, हालांकि पुलिस ने हालात पर काबू पा लिया।

अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-70 में उपद्रव के आरोप में 15 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्र ने कहा, ''छिटपुट घटनाओं को छोड़कर स्थिति नियंत्रण में है। सरकार द्वारा वेतन वृद्धि और अन्य मांगों पर निर्णय लिए जाने के बाद श्रमिक शांतिपूर्वक काम पर लौट गए हैं।''

पुलिस आयुक्त ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुबह से ही लगातार मार्च निकाले जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "सुबह 5:00 बजे से लगातार मार्च निकाले जा रहे हैं। आज सुबह श्रमिक तीन स्थानों पर इकट्ठा हुए; तत्काल संवाद के बाद उन्हें मात्र 15 मिनट के भीतर शांतिपूर्वक तरीके से हटा दिया गया।'' पुलिस आयुक्त ने कहा, "पिछले दो दिन में कई व्हॉट्सऐप समूह बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से क्यूआर कोड स्कैन करके श्रमिकों को जोड़ा जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि इन गतिविधियों के पीछे एक संगठित और सुनियोजित नेटवर्क सक्रिय है।"

सिंह ने कहा कि अशांति फैलाने में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और कार्रवाई जारी है। उन्होंने कहा, "भीड़ में शामिल ऐसे तत्वों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है; भविष्य में भी गिरफ्तारियां की जाएंगी। उनके वित्तीय स्रोतों की भी जांच की जाएगी। यदि यह पाया जाता है कि उन्हें राज्य या देश के बाहर से आर्थिक सहायता मिली है, तो इस संबंध में भी उचित कार्रवाई की जाएगी।"

सिंह ने बताया कि सोमवार को विभिन्न स्थानों से सामने आई घटनाओं के संबंध में सात प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा, "आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।" स्थिति को सुलझाने के प्रयासों के संदर्भ में पुलिस आयुक्त ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च-स्तरीय समिति हितधारकों के साथ चर्चा कर रही है।

उन्होंने कहा, "कल से यहां मौजूद उच्च-स्तरीय समिति ने सभी हितधारकों के साथ विस्तृत और लंबी बैठकें की हैं तथा कुछ सिफारिशें की हैं।'' सिंह ने कहा कि सरकार श्रमिकों की चिंताओं के प्रति संवेदनशील है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश सरकार श्रमिकों की शिकायतों को समझती है, उनकी स्थिति के प्रति सहानुभूति रखती है और उनके सभी मुद्दों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।"

अधिकारियों ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने सभी श्रेणियों के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ा दी है और संशोधित दरें एक अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी। गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा, ''मजदूरी में उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने वृद्धि की है।... इस फैसले को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कल देर रात मंजूरी दे दी।''

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों को अब 11,313 रुपये प्रति माह के बजाय 13,690 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि अर्ध-कुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी।

अन्य नगर निगम क्षेत्रों में संशोधित मासिक वेतन अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये तय किया गया है। शेष जिलों में अकुशल श्रमिकों को 12,356 रुपये प्रतिमाह, अर्धकुशल श्रमिकों को 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। यह फैसला नियोक्ता संगठनों और श्रमिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया।

सरकार ने कहा कि ''संतुलित और व्यावहारिक'' परिणाम के लिए सुझावों और आपत्तियों पर विचार किया गया। इस बीच, सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन खबरों को ''फर्जी और भ्रामक'' करार दिया, जिनमें दावा किया गया था कि श्रमिकों के लिए 20,000 रुपये प्रतिमाह की समान न्यूनतम मजदूरी तय कर दी गई है।

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