कानपुर पुलिस ने किया साइबर ठगी का भंडाफोड़, आठ गिरफ्तार
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में बर्रा थाना पुलिस ने एक संगठित साइबर फ्रॉड/डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए आठ अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह द्वारा फर्जी जीएसटी फर्मों और बैंकिंग चैनलों के दुरुपयोग के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का खुलासा हुआ है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने गुरुवार को पत्रकारों को बताया कि गिरोह के सदस्य फर्जी जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराकर विभिन्न बैंकों में करंट और ट्रस्ट खाते खुलवाते थे।
इन खातों के माध्यम से साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड से प्राप्त धनराशि को मंगाकर उसे इधर-उधर स्थानांतरित कर ठिकाने लगाया जाता था। इस पूरे नेटवर्क में कुछ बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता भी सामने आई है, जो खातों के संचालन और निगरानी में सहयोग कर 5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन प्राप्त करते थे। उन्होने बताया कि प्रारंभिक जांच में एक खाते के माध्यम से करीब 53 करोड़ 37 लाख रुपये, दूसरे से लगभग 66 करोड़ रुपये तथा अन्य खातों से करोड़ों रुपये के लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं।
इसके अतिरिक्त नवी मुंबई के एक साइबर थाने में दर्ज मामले से जुड़े करीब 58 करोड़ रुपये की डिजिटल ठगी की रकम भी इस नेटवर्क से संबंधित पाई गई है। इस कार्रवाई के तहत पुलिस ने आठ अभियुक्तों सोनू शर्मा, सतीश पांडेय, साहिल विश्वकर्मा, धर्मेंद्र सिंह, तनिष गुप्ता, अमित सिंह, अमित कुमार और आशीष कुमार को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से विभिन्न कंपनियों के नौ मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया है। अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि "डिजिटल अरेस्ट" जैसे किसी भी कॉल या संदेश पर विश्वास न करें तथा किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ अपनी बैंकिंग जानकारी या ओटीपी साझा न करें। संदिग्ध कॉल या लेनदेन की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर देने को कहा गया है।
