Bareilly: रिंग रोड के लिए जमीन छीनी, अब पाई-पाई को मोहताज किसान

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। शहर की महत्वाकांक्षी रिंग रोड परियोजना अब मुआवजे के विवादों की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। 32 गांवों से गुजरने वाली इस 29 किमी लंबी सड़क के लिए जमीन देने वाले सैकड़ों किसान अब दफ्तरों के चक्कर काट रहेके हैं। परियोजना का 78 फीसदी काम और 585 करोड़ का भुगतान तो हो चुका है, लेकिन शेष 167 करोड़ रुपये की फाइलें एसएलओ कार्यालय की धूल फांक रही हैं।

पस्तोर के 60, सरनिया के 15 और रोठा के 40 काश्तकारों समेत कई गांवों का पैसा अब तक नहीं मिला है। नियमों के मुताबिक, 80 प्रतिशत मुआवजा वितरण के बिना काम शुरू नहीं किया जा सकता । किसानों का कहना है कि किसी के घर में बेटी की शादी है तो किसी को कर्ज चुकाना है, लेकिन लेखपाल और बाबू उन्हें एक खिड़की से दूसरी खिड़की पर टरका रहे हैं। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी देश दीपक सिंह का कहना है कि तहसीलों से रिकॉर्ड देरी से आने और कुछ गांवों का अवार्ड समय पर न होने की वजह से भुगतान प्रक्रिया में विलंब हुआ है।

ये हैं प्रभावित गांव
धंतिया, परसाखेड़ा, रसूला चौधरी, रहपुरा जागीर, बल्ला कोठा, बादशाहनगर, सरनिया, महेशपुर अटरिया, रोठा मुस्तकिल, रोठा एहतमाली, सहसिया हुसैनपुर एहतमाली, सहसिया हुसैनपुर मुस्तकिल, सराय तल्फी मुस्तकिल, महगवां उर्फ ऊंचागांव, बिरिया नारायणपुर, इटौवा सुखदेवपुर, बेहती देहा जागीर, रौंधी मुस्तकिल, महेशपुर ठाकुरान, बुखारा, चौबारी मुस्तकिल, बारी नगला, उमरसिया, लखौरा, दुबराई, पलपुर कमलपुर, दारूपुर ठकुरान, पार्थसपुर, सैदपुर लछरी, सुंदरपुर और रजऊ परसपुर।

सरनिया के मोहम्मद आसिम की तीन एकड़ जमीन रिंग रोड के लिए ली गई है। आधा भुगतान तो मिला, लेकिन शेष राशि पांच महीने से अटकी है। आसिम का आरोप है कि एसएलओ कार्यालय के चक्कर काटकर थक चुके हैं, वहां बिना ''सुविधा शुल्क'' के फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही।

पस्तौर के मंगली राम की दो बीघा जमीन अधिग्रहित हुई है। उनका आरोप है कि लेखपाल की ओर से भेजी गई आधी-अधूरी जानकारी मुआवजे में बाधा बनी है। तीन महीने से डीएम व एसएलओ कार्यालय की दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका है।

पस्तौर निवासी ज्ञान प्रकाश की 16 बीघा जमीन रिंग रोड की भेंट चढ़ गई है। दो महीने से भटक रहे ज्ञान प्रकाश का कहना है कि लेखपाल ने फाइल अटका रखी है। एसएलओ से भी कई बार गुहार लगाई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

पस्तौर के नत्थूलाल की तीन बीघा जमीन अधिग्रहित हुए पांच महीने बीत चुके हैं। उनका आरोप है कि एसएलओ कार्यालय के कर्मचारी बात सुनना तो दूर, देखते ही टरका देते हैं। भुगतान न होने से उनके सामने अब गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

पस्तौर के सोहनलाल के घर 22 मई को शादी है। उनकी 14 बीघा जमीन अधिग्रहण की जा चुकी है, लेकिन छह महीने से कलेक्ट्रेट और एसएलओ कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद भुगतान नहीं मिला। मुआवजे के अभाव में शादी की तैयारियों पर संकट है।

पस्तौर के भागीरथ का आरोप है कि एसएलओ कार्यालय में दलाली हावी है। हमारी जमीन जा रही है और यहां हमसे ही कमीशन मांगा जाता है। कहा कि रिंग रोड में पांच बीघ जमीन चली गई, जिसमें अब तक महज दो बीघा जमीन का ही मुआवजा मिला है।

 

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