भारत ने लॉन्च किया स्वदेशी 'इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम', अब संकट से पहले मिलेगा मैसेज, देशभर के करोड़ों मोबाइल में गूंजा अलर्ट

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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नई दिल्लीः अगर आज आपके मोबाइल फोन पर अचानक एक तेज सायरन जैसी आवाज और 'इमरजेंसी अलर्ट' का मैसेज आया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। भारत सरकार ने आज अपनी स्वदेशी 'सेल ब्रॉडकास्ट' (Cell Broadcast) आपातकालीन चेतावनी प्रणाली का औपचारिक आगाज कर दिया है। इसी तकनीक का परीक्षण करने के लिए शनिवार को देशभर के करोड़ों मोबाइल यूजर्स को एक टेस्ट मैसेज भेजा गया।

शाह और सिंधिया ने किया 'सचेत' का शुभारंभ

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज संयुक्त रूप से इस हाई-टेक प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया। इस प्रणाली का केंद्र 'सचेत' (SACHET) नामक एकीकृत अलर्ट सिस्टम है। इसे दूरसंचार विभाग की अनुसंधान शाखा C-DOT ने अंतरराष्ट्रीय मानकों (ITU) के अनुरूप विकसित किया है। वर्तमान में यह सेवा देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय हो चुकी है।

नॉर्मल SMS से कितना अलग है यह सिस्टम?

यह तकनीक साधारण मैसेजिंग से कहीं ज्यादा उन्नत और प्रभावी है:

सायरन और वाइब्रेशन: जब सरकार यह अलर्ट भेजेगी, तो आपका फोन चाहे 'साइलेंट' या 'डू नॉट डिस्टर्ब' मोड पर क्यों न हो, वह एक तेज अलार्म के साथ वाइब्रेट करेगा।

फुल स्क्रीन डिस्प्ले: मैसेज सीधे स्क्रीन पर पॉप-अप होगा ताकि यात्री या सो रहे व्यक्ति का ध्यान तुरंत इस पर जाए।

आपको बता दें कि आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 अरब से ज्यादा अलर्ट भेज चुका है।

किन संकटों में मिलेगी मदद?

'सचेत' प्रणाली प्राकृतिक और मानव निर्मित, दोनों तरह की आपदाओं में जीवनरक्षक साबित होगी:

1- प्राकृतिक आपदा: भूकंप, सुनामी, चक्रवात, बिजली गिरना और बाढ़ जैसी स्थिति में।

2- मानव निर्मित संकट: गैस रिसाव, केमिकल दुर्घटना या अन्य किसी बड़े सार्वजनिक खतरे के दौरान।

भ्रम से रहे दूर

अलर्ट के बजते ही कुछ लोग ये बोलने को तैयार हो गए की सरकार सभी के फोन को सर्विलांस पर लगा रही है। जिससे सककी बाते रिकॉर्ड की जाएं, लेकिन ऐसा नहीं है। आजकल जिस तरह के हालात हो रखे हैं हर जगह युद्ध हो रहा है, कहीं न कहीं प्राकृतिक आपदाएं लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर रहे हैं। ऐसे में सरकार का उद्देश्य इस तकनीक के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच बनाना है। यह प्रणाली सुनिश्चित करेगी कि वास्तविक आपातकाल के दौरान बिना किसी देरी के हर नागरिक तक सटीक जानकारी पहुंचे, जिससे जनहानि को न्यूनतम किया जा सके।

 

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