सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर BJP का आया रिएक्शन, अमित मालवीय बोले-'चुनावी प्रक्रिया पर संदेह पैदा करने के प्रयासों के खिलाफ एक ''स्पष्ट संदेश'

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Published By Anjali Singh
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कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अमित मालवीय ने शनिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में मतगणना के लिए केंद्र सरकार के कर्मियों की तैनाती संबंधी निर्वाचन आयोग के आदेश में उच्चतम न्यायालय का हस्तक्षेप से इनकार, चुनावी प्रक्रिया पर संदेह पैदा करने के प्रयासों के खिलाफ एक ''स्पष्ट संदेश'' है। 

उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतगणना के लिए केंद्र सरकार के कर्मियों की तैनाती संबंधी निर्वाचन आयोग के परिपत्र को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर शनिवार को सुनवाई करते हुए कहा कि इस याचिका पर आगे कोई आदेश आवश्यक नहीं है। तृणमूल कांग्रेस ने कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा याचिका खारिज किए जाने के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। 

भाजपा नेता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ''उच्चतम न्यायालय ने एक और कानूनी झटका देते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस ने मतगणना पर्यवेक्षक की जिम्मेदारियों से राज्य सरकार के कर्मियों को बाहर रखे जाने को चुनौती देते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और तत्काल सुनवाई की मांग की थी।'' 

उन्होंने कहा, ''इस याचिका पर सुनवाई से इनकार एक स्पष्ट संदेश है कि मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करने या उस पर संदेह पैदा करने के प्रयासों को किसी भी सूरत में वैधता नहीं मिलेगी। एक और दिन ममता बनर्जी के लिए एक और न्यायिक हार।'' मालवीय की इस टिप्पणी पर तृणमूल की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। 

न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की विशेष पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग (ईसी) मतगणना कर्मियों का चयन कर सकता है और उसके 13 अप्रैल के परिपत्र को गलत नहीं कहा जा सकता है। निर्वाचन आयोग ने कहा कि परिपत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केंद्रीय और राज्य सरकार के कर्मी संयुक्त रूप से काम करेंगे और तृणमूल कांग्रेस की किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका निराधार है। 

निर्वाचन आयोग ने न्यायालय को आश्वासन दिया कि परिपत्र का अक्षरशः पालन किया जाएगा। तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शुरुआत में कहा था कि परिपत्र 13 अप्रैल का था लेकिन उन्हें इसकी जानकारी 29 अप्रैल को मिली। पीठ ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि निर्वाचन आयोग मतगणना कर्मियों का चयन केवल एक ही समूह यानी केंद्र सरकार से कर सकता है और इसलिए उसके परिपत्र को गलत नहीं कहा जा सकता। 

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