आईपीओ-एनएफओ की चमक में न फंसें

Amrit Vichar Network
Edited By Deepak Mishra
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हर कुछ दिनों में कोई नया IPO चर्चा में आ जाता है। कहीं खुदरा निवेशक अपनी मेहनत की कमाई बाजार की चमक और प्रचार के प्रभाव में जोखिम में तो नहीं डाल रहा?

RAJAT
रजत मेहरोत्रा,
वित्तीय एवं आर्थिक विशेषज्ञ

भारतीय निवेशक के सामने आज अवसर भी बहुत हैं और भ्रम भी। लगभग हर कुछ दिनों में कोई नया IPO चर्चा में आ जाता है, तो म्यूचुअल फंड कंपनियां नए NFO लेकर बाजार में उतर रही हैं। सोशल मीडिया पर लिस्टिंग गेन, ग्रे मार्केट प्रीमियम और कई गुना आवेदन की चर्चा निवेशकों को आकर्षित करती है। वहीं NFO को अक्सर 10 रुपये की शुरुआती NAV के कारण ‘सस्ता’ अवसर मान लिया जाता है, लेकिन वर्तमान वैश्विक और घरेलू अनिश्चितता के बीच सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या हर नया IPO और NFO वास्तव में निवेश का अवसर है? या कहीं खुदरा निवेशक अपनी मेहनत की कमाई बाजार की चमक और प्रचार के प्रभाव में जोखिम में तो नहीं डाल रहा?

IPO को समझने के लिए सबसे पहले फ्रेश इश्यू और OFS यानी ऑफर फॉर सेल का अंतर जानना जरूरी है। फ्रेश इश्यू में नए शेयर जारी करके जुटाया गया पैसा कंपनी को मिलता है। इसका उपयोग कारोबार के विस्तार, नई परियोजनाओं, कर्ज कम करने, तकनीक, कार्यशील पूंजी या अधिग्रहण के लिए किया जा सकता है। इसके विपरीत OFS में मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं और उससे प्राप्त पैसा कंपनी के पास नहीं जाता। इसका अर्थ यह नहीं कि हर OFS खराब है। प्रमोटर या शुरुआती निवेशक वर्षों बाद अपनी हिस्सेदारी का कुछ भाग बेच सकते हैं, लेकिन यदि कोई IPO मुख्य रूप से OFS है, कंपनी को नई पूंजी नहीं मिल रही और मूल्यांकन पहले से बहुत ऊंचा है, तो खुदरा निवेशक को जरूर पूछना चाहिए-मैं किस कीमत पर और किससे यह हिस्सेदारी खरीद रहा हूं?

यही सावधानी NFO में भी जरूरी है। कई निवेशक सोचते हैं कि 10 रुपये की NAV वाला नया फंड सस्ता है, जबकि 100 या 500 रुपये की NAV वाला पुराना फंड महंगा है। यह धारणा सही नहीं है। म्यूचुअल फंड की NAV किसी शेयर की कीमत की तरह सस्ते या महंगे होने का पैमाना नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि फंड की निवेश रणनीति क्या है, वह किन कंपनियों या परिसंपत्तियों में निवेश करेगा, जोखिम कितना है और उसी श्रेणी में पहले से उपलब्ध योजनाओं का प्रदर्शन कैसा रहा है।

भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग का आकार तेजी से बढ़ा है और घरेलू निवेशक बाजार की महत्वपूर्ण ताकत बन चुके हैं। यह भारत में वित्तीय बचत के बढ़ते महत्व का सकारात्मक संकेत है, लेकिन उद्योग का बढ़ना इस बात की गारंटी नहीं कि हर नया NFO निवेश के योग्य है। नए फंड का अपना प्रदर्शन इतिहास नहीं होता, इसलिए केवल नई थीम, आकर्षक नाम या जोरदार विज्ञापन निवेश का आधार नहीं बनना चाहिए।

वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां इस सावधानी को और जरूरी बनाती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, पश्चिम एशिया में अस्थिरता तथा कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़े जोखिम भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है। यदि तेल महंगा होता है, तो उसका प्रभाव केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। परिवहन, विमानन, पेंट, प्लास्टिक, रसायन, उर्वरक और अनेक उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। महंगा तेल रुपये, महंगाई और देश के आयात बिल पर भी दबाव डाल सकता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का रुख भी लगातार एक जैसा नहीं रहा है।

वैश्विक ब्याज दरें, डॉलर, भू-राजनीतिक तनाव और भारतीय शेयरों का मूल्यांकन विदेशी निवेश प्रवाह को प्रभावित करते हैं, इसलिए यह मान लेना उचित नहीं कि हर बड़ी गिरावट में विदेशी निवेशक तुरंत बाजार को सहारा देने लौट आएंगे। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेश और SIP भारतीय बाजार को महत्वपूर्ण आधार दे रहे हैं। ऐसे वातावरण में कुछ म्यूचुअल फंड योजनाएं बाजार के मूल्यांकन और जोखिम को देखते हुए नकदी रख सकती हैं, लेकिन निवेशकों को यह समझना चाहिए कि अधिक नकदी रखना हमेशा कमजोरी नहीं है। कभी-कभी नकदी भविष्य में बेहतर कीमत पर निवेश करने का अवसर भी देती है। फिर भी सभी फंड हाउस या सभी योजनाओं को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल है, निवेशक क्या करे? पहली रणनीति है, भीड़ के पीछे भागने से बचें। IPO केवल इसलिए न खरीदें कि उसका ग्रे मार्केट प्रीमियम ऊंचा है। कंपनी की बिक्री, मुनाफा, नकदी प्रवाह, कर्ज, प्रमोटर की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी क्षमता को देखें। यह भी समझें कि IPO से जुटाया पैसा कंपनी के विकास में जाएगा या मुख्य रूप से पुराने निवेशक बाहर निकल रहे हैं। NFO में निवेश करने से पहले पूछें कि क्या यह योजना आपके पोर्टफोलियो में वास्तव में कोई नई उपयोगिता जोड़ती है। यदि उसी श्रेणी में पहले से लंबे प्रदर्शन इतिहास वाला फंड उपलब्ध है, तो दोनों की तुलना जरूरी है। 

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