छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : ईडी ने छापेमारी के दौरान सोने के आभूषण, बुलियन और नकदी की जब्त

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Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में कथित रूप से 2,800 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ी धनशोधन मामले की जांच के सिलसिले में की गई हालिया छापेमारी के दौरान 53 लाख रुपये की नकद राशि और चार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सोने के आभूषण एवं बुलियन जब्त किए गए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रविवार को यह जानकारी दी।

शराब कारोबारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट, व्यवसायियों और कॉरपोरेट इकाइयों के रायपुर, दुर्ग, भिलाई (दुर्ग जिला) और बिलासपुर स्थित परिसरों पर 30 अप्रैल को छापे मारे गए। प्रवर्तन निदेशालय ने एक बयान में कहा कि इन इकाइयों पर इस कथित 'घोटाले' से अर्जित अपराध की आय प्राप्त करने, उसे संभालने, कई स्तरों पर घुमाने या छिपाने का संदेह है।

एजेंसी ने कहा कि छापेमारी के दौरान 53 लाख रुपये की नकदी और 3.23 किलोग्राम सोने के आभूषण तथा बुलियन जब्त किए गए, जिनकी कीमत 4.86 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, ''आपत्तिजनक'' दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए गए। केंद्रीय एजेंसी इस मामले में पहले भी कई दौर की छापेमारी कर चुकी है और अब तक 380 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ। निदेशालय ने आरोप लगाया है कि राज्य के वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक हस्तियों से जुड़े एक ''आपराधिक'' गिरोह ने छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया था, जिससे राज्य के खजाने को ''भारी नुकसान'' हुआ। एजेंसी ने अपराध से अर्जित आय 2,883 करोड़ रुपये आंकी है। एजेंसी इस मामले में अब तक छह आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और 81 आरोपियों के नाम दर्ज कर चुकी है। 

इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास, पूर्व संयुक्त सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और मुख्यमंत्री कार्यालय में पूर्व उपसचिव सौम्या चौरसिया सहित अन्य लोग शामिल हैं। इन आरोपियों ने ईडी की कार्यवाही को विभिन्न अदालतों में चुनौती दी है।  

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