जिंदगी का सफर : बाल कलाकार से दिग्गज अभिनेत्री तक  

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Published By Anjali Singh
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74 वर्ष की उम्र में भी अपनी जीवंत उपस्थिति से दर्शकों को आकर्षित करने वाली अभिनेत्री अरुणा ईरानी हिंदी सिनेमा का एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने लंबे समय तक अपने अभिनय और नृत्य से दर्शकों के दिलों पर राज किया। 3 मई 1952 को मुंबई में जन्मीं अरुणा ने बेहद कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते सैकड़ों फिल्मों का हिस्सा बन गईं।

अरुणा ईरानी ने अपने करियर की शुरुआत 1961 में गंगा जमुना से की, जिसमें उन्होंने एक बाल कलाकार के रूप में काम किया। उस समय वे मात्र 9 वर्ष की थीं। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और 300 से अधिक हिंदी फिल्मों में अभिनय किया। उनके करियर की खास पहचान उनके शानदार डांस नंबर रहे, जिनमें “चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी” और “दिलबर दिल से प्यारे” जैसे गीत आज भी लोकप्रिय हैं। 

फिल्म कारवां में उनके अभिनय और नृत्य को विशेष सराहना मिली, जिसने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ बॉम्बे टू गोवा में भी काम किया, जो उनके करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिनी जाती है। इस दौर में उनका नाम कॉमेडियन महमूद के साथ भी जोड़ा गया, जिनके साथ उन्होंने कई फिल्मों में काम किया। अरुणा ईरानी न केवल एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री रहीं, बल्कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में नए कलाकारों को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई।

जितेंद्र, ऋ षि कपूर, डिंपल कपाड़िया, जयाप्रदा और संजय दत्त जैसे कलाकारों के शुरुआती दौर में उन्होंने सहयोग दिया। हालांकि इनमें से कई सितारे आगे चलकर सुपरस्टार बने, जबकि अरुणा का सफर मुख्यतः सहायक भूमिकाओं तक सीमित रह गया। फिर भी, उनके अभिनय को अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस अवॉर्ड फिल्म “पेट प्यार और पाप” और बेटा के लिए मिला। 

इसके अलावा 2012 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने टीवी की दुनिया में भी अपनी पहचान बनाई। “जमाना बदल गया” से छोटे पर्दे पर शुरुआत करने के बाद वे कहानी घर-घर की, झांसी की रानी और देखा एक ख्वाब जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में नजर आईं। अरुणा ईरानी का सफर संघर्ष, समर्पण और निरंतरता की मिसाल है, जो उन्हें हिंदी सिनेमा की एक खास और सम्मानित शख्सियत बनाता है।