Bareilly : डोहरा तालाब में मिला खतरनाक एमडीआर ई कोलाई बैक्टीरिया
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने किया शोध, एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर
बरेली, अमृत विचार। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के शोध में डोहरा स्थित तालाब का पानी अब गंभीर स्वास्थ्य खतरे में बदलता नजर आ रहा है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संजय पटेल के नेतृत्व में किए गए शोध में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं।
डॉ. पटेल ने बताया कि मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट ई कोलाई बैक्टीरिया कई एंटीबायोटिक दवाओं का प्रतिरोधी है जो सीधे इंसान की सेहत के लिए खराब है। समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो बड़ा खतरा बन सकता है। उन्होंने बताया कि तालाब में लंबे समय से जमा गंदगी और आसपास से आ रहे सीवेज ने पानी की गुणवत्ता को बेहद खराब कर दिया है। अध्ययन में पाया गया कि पानी में मौजूद ई कोलाई का यह प्रकार सामान्य दवाओं से नियंत्रित नहीं हो रहा। इस संक्रमण के फैलने से इलाज में जटिलता बढ़ सकती है। उन्होंने बताया कि तीन महीने तक तालाब के पानी में टेट्रासाइक्लिन नाम एंटीबायोटिक का प्रयोग किया लेकिन वह बेअसर रही। ई कोलाई बैक्टीरिया के संपर्क में आने से डायरिया, मूत्र मार्ग संक्रमण, त्वचा रोग और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। दूषित पानी के सीधे उपयोग के अलावा यह बैक्टीरिया खाद्य पदार्थों और अन्य माध्यमों से भी मानव शरीर तक पहुंच सकता है। जिससे व्यापक स्तर पर संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि डोहरा तालाब के पानी में मिले ई कोलाई बैक्टीरिया से ही दूषित पानी से जनवरी माह में इंदौरमें कई लोगों की जान चली गई थी। इस खतरे से बचाव के लिए स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य और पर्यावरण विशेषज्ञों ने सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था को दुरुस्त करने, जल स्रोतों की नियमित जांच कराने और तालाब की सफाई कराने की सिफारिश की है। साथ ही लोगों को बिना उपचार के पानी का उपयोग न करने और तालाब की घास जानवरों को नहीं खिलान तथा स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी गई है।
