49 साल बाद तमिलनाडु में एमजी रामचंद्रन जैसा करिश्मा, जानें कौन से वादों ने थलपति को सीएम की कुर्सी के करीब पहुंचाया
सत्ता पाने की सीढ़ी कहीं छोटी न रह जाए, इसलिए उन्होंने कर डाले बड़े- बड़े वादे
चुनाव डेस्क, अमृत विचार। तमिलनाडु में अभिनेता थलपति विजय की ताजपोशी होना तय है। विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम ने इतिहास रच दिया है। थलपति विजय मुख्यमंत्री बनने पर पिछले 49 साल का रिकार्ड तोड़ देंगे। एमजी रामचंद्रन द्वारा 1977 के विधानसभा चुनाव में भारी जीत हासिल करने के बाद राज्य में अपनी नई पार्टी खड़ी करके अभिनेता से मुख्यमंत्री बनने वाले दूसरे व्यक्ति होंगे। अभिनेता विजय के सात वादों ने उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी के करीब पहुंचा दिया।सोना, सिलिंडर, महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा, 12 वीं तक के बच्चों को प्रत्येक वर्ष 15 हजार रुपये की आर्थिक मदद और बेरोजगारी भत्ता जैसे उनके वादे डीएमके को सत्ता से हटाने में बड़े मददगार बने। सत्ता पाने की सीढ़ी कहीं छोटी न रह जाए, इसलिए उन्होंने बड़े- बड़े वादे कर डाले।
‘मैदान में कदम रख दिया तो जीतना ही होगा’
थलपति विजय का फिल्म ‘बिगिल’ के हिट डॉयलाग ‘ मैंने एक बार मैदान में कदम रख दिया तो जीतना ही होगा’ के साथ सीटी बजाना उनकी जनसभाओं में उमड़ती भीड़ का उत्साह आसमान पर पहुंचा देता था। इससे उनकी फैन फालोइंग वोटों में तब्दील हो गई। चुनाव अभियान आगे बढ़ने के साथ जेन-जी और युवा वोटर्स जो अपनी पारंपरिक पार्टियों से नाराज और बदलाव की तलाश में थे, उनके साथ तेजी से जुड़ते चले गए। ऐसे में विजय को लगा कि मुफ्त की रेवड़ियां बांटने का वादा करके वे सत्ता के शीर्ष पर पहुंच सकते हैं। उन्होंने ऐसा किया भी। गांव- गांव, शहर की हर गली में समर्थक युवाओं की मजबूत टोली ने उनके हर वादे को घूम-घूमकर घर- घर तक पहुंचाया। इसलिए उन्होंने न सिर्फ अन्नाद्रमुक और भाजपा नेताओं के गठबंधन प्रस्ताव को ठुकराया बल्कि द्रमुक की सहयोगी पार्टी कांग्रेस के गठजोड़ के प्रयास को भी सिरे से खारिज किया। थलपति विजय न सिर्फ सत्तारूढ़ डीएमके मुखिया एमके स्टालिन पर आक्रमक रहे बल्कि अन्नाद्रमुक और भाजपा को भी उन्होंने खूब खरी खोटी सुनाई। वे यह स्थापित करने में कामयाब रहे कि द्रमुक और अन्नाद्रमुक नहीं बल्कि वे ही सत्ता में आकर वहां के लोगों की तकदीर और तमिलनाडु की तस्वीर बदल सकते हैं। थलपति विजय ने 60 साल उम्र तक की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का वादा किया।

कहा कि इस उम्र की ऐसी महिलाएं जो घर की मुखिया होंगी, उन्हें 2,500 रुपये प्रतिमाह देंगे। इसके साथ ही उन्होंने हर परिवार को छह एलपीजी गैस सिलिंडर फ्री में देने की बात कही थी। इसके साथ ही बहन-बेटियों के विवाह के लिए आठ ग्राम सोना देने का वादा किया। सिल्क साड़ी देने की उनकी योजना ने भी मतदाताओं का ध्यान खींचा। सोने की बढ़ती कीमतों के बीच आठ ग्राम सोना फ्री मिलने की बात हर मतदाता को अच्छी लगी। कक्षा 1 से 12 तक के स्टूडेंट्स के लिए हर साल 15 हजार की मदद का एलान अभिभावकों को लुभा गया तो सरकारी बसों में महिलाओं के लिए फ्री का वादा भी काम कर गया। ग्रेजुएट्स को चार हजार रुपये और डिप्लोमा धारकों को ढाई हजार रुपये बेरोजगारी भत्ता देने के वादे ने युवाओं को विजय के साथ आने पर मजबूर किया। 5 एकड़ तक जमीन वाले छोटे किसानों का पूरा कर्ज माफ करने और 5 एकड़ से ज्यादा जमीन वाले किसानों का 50 फीसदी कर्ज माफ करने के वादे ने किसानों को उनकी तरफ मोड़ा। अब देखना यह है कि सत्ता शीर्ष पर बैठने के बाद विजय इन वादों को कब और कैसे पूरा करते हैं।

