बजट में फंसी कृषि फार्मों की ऊसर भूमि, लखनऊ में फंड के अभाव में अधर में लटका सुधार कार्य

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Published By Anjali Singh
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- 1100 हेक्टेयर भूमि के सापेक्ष 50 फीसद हुआ कार्य

लखनऊ, अमृत विचार : वित्तीय वर्ष 2026-27 में आठ सरकारी कृषि प्रक्षेत्र यानी फार्मों में शुरू हुई ऊसर भूमि सुधार याेजना बजट के अभाव में अधर में लटक गई है। अप्रैल से परियोजनाओं पर कराए गए 50 फीसद कार्यों का भूमि संरक्षण विभाग को बजट नहीं मिला है और जून अंत तक 1100 हेक्टेयर भूमि सुधार कर परियोजनाएं पूर्ण करनी हैं।

जिले में राजकीय प्रक्षेत्र डेहवा, राजकीय प्रक्षेत्र रहीमाबाद अंतर्गत तिलन प्रथम, तिलन द्वितीय, माझगांव व रहटा, राजकीय प्रक्षेत्र कटियार अंतर्गत पवांया, गहदो व सुमेरपुर कृषि फार्मों की 1100 हेक्टेयर ऊसर भूमि सुधारकर बीज उत्पादन बढ़ाने की दिसंबर 2025 में योजना आई थी। इनमें कार्यों का 4.50 करोड़ रुपये बजट मार्च में आवंटित हुआ था। लेकिन, समय कम होने के कारण कार्ययोजना तैयार नहीं हो पाई थी और वर्ष समाप्ति पर बजट वापस हो गया था। 

इधर, नये वर्ष के अप्रैल में भूमि संरक्षण विभाग ने परियोजनाओं पर काम शुरू करके 50 फीसद तक कार्य पूर्ण कर लिए लेकिन, बजट नहीं मिला। इससे आगे के कार्य ठप हो गए। भूमि संरक्षण अधिकारी संगीता कटियार ने बताया कि परियोजनाओं पर कार्य चल रहे हैं। बजट आते ही भुगतान हो जाएगा और समय पर परियोजनाएं पूर्ण कर लेंगे। ऊसर भूमि सुधार से बीजों का उत्पादन बढ़ेगा। इससे किसानों को फायदा होगा।

इन फार्मों में इतनी ऊसर भूमि
डेहवा  15.48 हेक्टेयर
तिलन प्रथम 230.29 हेक्टेयर
तिलन द्वितीय 151.90 हेक्टेयर
माझगांव 102 हेक्टेयर
रहटा 32.49 हेक्टेयर
पवांया 109.68 हेक्टेयर
गहदो 156.33 हेक्टेयर
सुमेरपुर  96.73 हेक्टेयर
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