अहंकार और भ्रष्टाचार ने डुबाया ममता का किला ? जानें क्या रहीं हार की बड़ी वजह
कोलकाता। अहंकार और भ्रष्टाचारियों के बचाव के साथ मुस्लिम परस्ती के कारण ममता बनर्जी का पतन हुआ और पश्चिम बंगाल में भगवा लहर बनी। साल 2011 के बाद से कोलकाता सहित बंगाल में सफेद साड़ी में लिपटी ममता बनर्जी के पोस्टर लगाए जाते थे, जिनमें नीचे लिखा रहता था- ईमानदारी की प्रतीक। लेकिन 2026 आते-आते इस सफेद साड़ी पर भ्रष्टाचार के बहुत सारे धब्बे लग चुके थे।

सरकारी कर्मचारियों ने इस बार टीएमसी का साथ छोड़ दिया, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उनके बकाया डीए का भुगतान नहीं किया गया। नियुक्ति घोटाले के कारण 26 हजार टीचरों की बरखास्तगी गले की हड्डी बन गई। इस मामले में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उनके समर्थन में ममता सुप्रीम कोर्ट तक गई थीं। तत्कालीन शिक्षा मंत्री परेश अधिकारी की बेटी की नियुक्ति अध्यापिका के पद पर अवैध रूप से की गई थी। हाई कोर्ट के आदेश पर उनकी बर्खास्तगी हुई थी। लेकिन इस बार उन्हें फिर टिकट दे दिया गया, नतीजन पुरुलिया जिले में तृणमूल का सूपड़ा साफ हो गया है।

राशन घोटाले के प्रमुख अभियुक्त व पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक को फिर पार्टी ने टिकट दिया, जिससे उत्तर 24 परगना में टीएमसी की हवा निकल गई। इसी तरह आरजी कर कांड ने सिर्फ राज्य ही नहीं पूरे देश को हिला दिया था। इस मामले में ममता बनर्जी की भूमिका पश्चिम बंगाल की महिलाओं को रास नहीं आई। कानून और व्यवस्था का ध्वस्त होना भी उनके पतन का प्रमुख कारण बना। ममता के खिलाफ गुस्सा डायमंड हार्बर से समझा जा सकता है, लोकसभा चुनाव में इस सीट से अभिषेक बनर्जी करीब सात लाख मतों से जीते थे। लेकिन यहां की सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली।
