यूपी की आयुष शिक्षा में डिजिटल क्रांति: 17 आयुर्वेद और होम्योपैथी कॉलेजों में बनेंगे 51 स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक तकनीक से पढ़ाई
-मुख्यमंत्री ने दी आयुष छात्रों को स्मार्ट क्लास की सौगात
लखनऊ, अमृत विचार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आयुष चिकित्सा शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश के 17 आयुर्वेद और होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों में 51 स्मार्ट क्लासरूम विकसित किए जाएंगे। इन स्मार्ट क्लासों में डिजिटल तकनीकों और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) का उपयोग किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक और इंटरएक्टिव शिक्षा का अनुभव मिल सकेगा।
आयुष महानिदेशक एवं मिशन निदेशक चैत्रा वी. ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष शिक्षा को समय की मांग के अनुरूप तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए शिक्षा व्यवस्था का आधुनिक होना जरूरी है।
स्मार्ट क्लासरूम में इंटरएक्टिव फ्लैट पैनल (आईएफपी), ऑडियो-वीडियो सिस्टम और डिजिटल लर्निंग टूल्स लगाए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को रियल टाइम इंटरएक्शन, मल्टीमीडिया कंटेंट और ऑनलाइन अध्ययन जैसी सुविधाएं मिलेंगी। सरकार का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक डिजिटल संसाधनों से जोड़कर विद्यार्थियों को नई तकनीकी दक्षताओं से लैस करना है।
लखनऊ, बरेली, पीलीभीत समेत 8 जिलों के आयुर्वेदिक संस्थान भी शामिल
प्रदेश के जिन संस्थानों में स्मार्ट क्लासरूम विकसित किए जाएंगे, उनमें प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, गाजीपुर, मुरादाबाद, आजमगढ़, गोरखपुर और अलीगढ़ के होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। वहीं आयुर्वेदिक संस्थानों में लखनऊ, पीलीभीत, बरेली, मुजफ्फरनगर, बांदा, झांसी, प्रयागराज और वाराणसी के कॉलेजों को शामिल किया गया है। सरकार ने इस परियोजना के लिए यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन को कार्यदायी संस्था नामित किया है। इन स्मार्ट क्लासों के माध्यम से विद्यार्थियों में नवाचार, शोध क्षमता और पेशेवर दक्षता को बढ़ावा देने की योजना है।
केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनेगा
इसके साथ ही लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) के जरिए सभी आयुष संस्थानों के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म पर अध्ययन सामग्री, असाइनमेंट, ऑनलाइन लेक्चर और प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी। विद्यार्थी किसी भी समय और कहीं से भी डिजिटल कंटेंट तक पहुंच सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे संस्थानों के बीच ज्ञान साझा करने की प्रक्रिया मजबूत होगी और आयुष शिक्षा को रिसर्च एवं इनोवेशन से नई दिशा मिलेगी।
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