गोरखपुर-मुरादाबाद में बनेंगी अत्याधुनिक फिश मंडियां, प्रदेशभर में होगा जलाशयों और तालाबों का डिजिटल सर्वे 

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Published By Anjali Singh
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-डिजिटल तकनीक और आधुनिक फिश मंडियों से बदलेगा यूपी का मत्स्य क्षेत्र -मत्स्य उत्पादन के लिए प्रदेश भर के जलाशयों और तालाबों का होगा डिजिटल सर्वे

लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में मत्स्य पालन और फिश कारोबार को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार ने दो बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी है। एक ओर गोरखपुर और मुरादाबाद में अत्याधुनिक फिश मंडियां, एक्वापार्क और फिश प्रोसेसिंग सेंटर विकसित किए जाएंगे, वहीं दूसरी ओर प्रदेश भर के जलाशयों और तालाबों का डिजिटल सर्वे कर मत्स्य उत्पादन को वैज्ञानिक आधार दिया जाएगा। दोनों योजनाओं का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि और फिश कारोबार को आधुनिक बाजार से जोड़ना है।

मत्स्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार “स्टेट ऑफ आर्ट होल सेल फिश मंडी, एकीकृत एक्वापार्क और फिश प्रोसेसिंग सेंटर” योजना पीपीपी मॉडल पर संचालित होगी। इसके प्रथम चरण के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। गोरखपुर में करीब 27 एकड़ भूमि पर एकीकृत एक्वापार्क विकसित किया जाएगा, जबकि गोरखपुर और मुरादाबाद में आधुनिक फिश मंडियां स्थापित होंगी।

इन मंडियों में हाईजेनिक फिश सेलिंग प्लेटफॉर्म, कोल्ड स्टोरेज, आइस प्लांट, डिजिटल ट्रेडिंग, ई-नीलामी, पैकेजिंग यूनिट और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। फिश प्रोसेसिंग यूनिट में टेस्टिंग लैब, क्यूआर कोड आधारित ट्रेसबिलिटी सिस्टम और रेडी-टू-ईट उत्पाद तैयार करने की व्यवस्था होगी।

शासन का दावा है कि इससे पोस्ट हार्वेस्ट लॉस 20-25 प्रतिशत से घटकर 10-15 प्रतिशत तक आ जाएगा और मत्स्य पालकों को बेहतर बाजार मिलेगा। एक्वापार्क में आधुनिक मत्स्य पालन प्रदर्शन केंद्र, लाइव डेमो, जल पर्यटन, बोटिंग, फूड कोर्ट, रिसॉर्ट, सनसेट प्वाइंट और 30 कमरों वाला होटल विकसित करने की योजना है। सरकार का मानना है कि इससे रोजगार और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

डिजिटल सर्वे के पहले चरण में खर्च होगा 1.5 करोड़

डिजिटल सर्वे योजना के पहले चरण में 150 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है, जबकि कुल परियोजना लागत 3.06 करोड़ रुपये तय की गई है। सरकार ने वर्ष 2028 तक मत्स्य क्षेत्र से 45 हजार करोड़ रुपये डीवीए, वर्ष 2030 तक 55 हजार करोड़ रुपये और वर्ष 2047 तक 1.20 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया है।

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