भारत में FCRA संशोधन पर अमेरिका को क्यों लगी मिर्ची? रिश्तों को लेकर वॉशिंगटन ने दिया बड़ा बयान, जानें पूरा मामला

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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FCRA को लेकर भारत-अमेरिका रिश्तों पर बड़ा बयान

भारत के FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) नियमों को लेकर अमेरिका ने चिंता जताई है। अमेरिका ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों और गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े मुद्दों पर बड़ा बयान दिया है। जानिए FCRA विवाद और इसके पीछे की पूरी कहानी।

वाशिंगटन। अमेरिकी सांसद रिले मूर ने भारत में गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), न्यासों, शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक संगठनों को मिलने वाले विदेशी चंदे से संबंधित कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता जताई और कहा कि इनका असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है। वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद मूर ने मंगलवार को कहा कि विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधन भारतीय सरकार को गिरजाघरों और धार्मिक परोपकारी संस्थाओं का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की अनुमति देंगे तथा यह ''ईसाइयों पर स्पष्ट हमला'' होगा।

अमेरिकी सांसद को सता रहा किस बात का डर?

मूर ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''प्रभु यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने के कुछ ही दशक बाद सेंट थॉमस भारत के मालाबार तट पर पहुंचे थे और तभी से भारत में ईसाइयों की उपस्थिति है लेकिन इतने लंबे इतिहास के बावजूद भारत की संसद विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) नियमों में ऐसे बदलाव पर विचार कर रही है, जिससे सरकार गिरजाघरों और धार्मिक परोपकारी संस्थाओं का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकेगी।'' उन्होंने कहा, ''यह ईसाइयों पर स्पष्ट हमला है। यदि यह विधेयक इसी स्वरूप में आगे बढ़ता है तो भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों में यह गंभीर चिंता का विषय होगा।'' 

क्या है FCRA

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 में सरकार को एक 'नामित प्राधिकरण' गठित करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। यह प्राधिकरण उन मामलों में विदेशी अंशदान और उससे निर्मित परिसंपत्तियों का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकेगा, जब किसी संगठन का एफसीआरए पंजीकरण रद्द हो जाए, वह स्वेच्छा से पंजीकरण छोड़ दे या नवीनीकरण नहीं होने के कारण समाप्त हो जाए। 

FCRA में होने वाले बदलाव 

विधेयक में यह भी प्रावधान है कि यदि संबंधित परिसंपत्ति कोई पूजा स्थल है, तो नामित प्राधिकरण उसके धार्मिक स्वरूप को बनाए रखना सुनिश्चित करेगा। इसमें नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम सजा भी पांच वर्ष के कारावास से घटाकर एक वर्ष करने का प्रस्ताव किया गया है।

 FCRA पर क्या कहते है आकड़ें  

गृह मंत्रालय के अनुसार 2019 से 2022 के बीच 13,520 संगठनों को विदेशी अंशदान के रूप में 55,741 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। एफसीआरए पोर्टल के अनुसार, 15 जुलाई 2026 तक 14,449 संगठनों के एफसीआरए प्रमाणपत्र सक्रिय थे, जबकि 22,498 प्रमाणपत्र रद्द किए जा चुके थे और 15,212 प्रमाणपत्रों की अवधि समाप्त मानी गई थी।

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