मुरादाबाद: देहात सीट पर लंबे समय तक रहा हक परिवार का कब्जा
सलमान खान/मुरादाबाद, अमृत विचार। देहात विधानसभा सीट की बात करें तो यहां 16 बार के चुनाव में 12 बार मुस्लिम विधायक चुने गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा हक परिवार का देहात विधानसभा सीट पर कब्जा रहा है। रिजवान उल हक तीन बार, उनके बेटे उस्मान उल हक एक बार व भाई शमीम उल हक दो …
सलमान खान/मुरादाबाद, अमृत विचार। देहात विधानसभा सीट की बात करें तो यहां 16 बार के चुनाव में 12 बार मुस्लिम विधायक चुने गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा हक परिवार का देहात विधानसभा सीट पर कब्जा रहा है। रिजवान उल हक तीन बार, उनके बेटे उस्मान उल हक एक बार व भाई शमीम उल हक दो बार विधायक रह चुके हैं।
मुरादाबाद देहात सीट पर दबदबे की बात करें तो इस सीट पर काफी लंबे समय तक हक परिवार ने कब्जा रखा है। एक दौर था जब मुरादाबाद देहात विधानसभा की राजनीति खमानी सिंह और रियासत हुसैन के ही इर्द-गिर्द रहती थी। लेकिन, 1985 में देहात विधानसभा सीट की जनता ने इन दोनों को नकारते हुए एलकेडी के प्रत्याशी रिजवान उल हक को विधायक चुना।
विधायक बनने के बाद रिजवान उल हक ने सादगी और इमानदारी से जनता की सेवा की और बहुत कम समय में जनता के लोकप्रिय नेता हो गए। 1989 में हुए विधानसभा चुनाव में देहात विधान सभा की जनता ने उन्हे दूसरी बार विधायक चुन लिया। उस समय की बात करें तो रिजवान उल हक रात-दिन जनता की सेवा में रहते थे। वह जनता की समस्याओं के लिए अधिकारियों से भिड़ जाते थे।
यह ही वजह रही कि 1991 में जनता ने अपने चहेते नेता को तीसरा बार लगातार विधायक बनाया। तीन बार के विधायक रहे रिजवान उल हक की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उनके बाद उनके भाई शमीम उल हक ने 2002 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2007 में हुए चुनाव में शमीम उल हक ने मरहूम भाई रिजवान उल हक की राजनीतिक विरासत अपने भतीजे उस्मान उल हक के हाथ सौंप दी और 2007 में उस्मान सपा के टिकट पर सबसे कम उम्र के विधायक बने। कुछ समय बाद मोअज्जम हत्याकांड में उस्मान उल हक को उम्रकैद की सजा हो गई और उन्होंने विधायकी के तीन साल जेल में काटे।
वह मौजूदा समय में भी फरुखाबाद की जेल में बंद है। 2012 में एक बार फिर शमीम उल हक ने समाजवादी पार्टी से किस्मत आजमाई और जीत हासिल की। इस तरह देहात विधान सभा सीट पर हक परिवार का लंबे समय तक कब्जा रहा है। बाद में दो बार विधायक रहे शमीम उल हक की बीमारी के कारण मौत हो गई। इस बार चुनाव में दो बार देहात विधायक रहे शमीम उल हक के बेटे कसीमुल हक सपा से टिकट मांग रहे है, वहीं दूसरी ओर जेल में बंद एक बार विधायक रहे उस्मान अपनी बहन को देहात सीट से चुनाव में उतारने की तैयारी में हैं।
