अमेरिका ने भारत समेत 17 देशों पर फोड़ा टैरिफ का बम, लगाया 10% का एक्स्ट्रा शुल्क, फोर्स लेबर को बताया बड़ी वजह 

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Edited By Anjali Singh
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वाशिंगटन। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी (Forced Labour) से तैयार वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने के प्रयासों के तहत भारत समेत 17 देशों से आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह नया शुल्क शुक्रवार रात 12:01 बजे से प्रभावी होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी ज्ञापन के अनुसार, यह फैसला उन देशों को बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और उसके सख्त क्रियान्वयन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

पहले अमेरिका ने व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, भारत सरकार द्वारा 14 जून को विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को देखते हुए अमेरिका ने भारत के लिए प्रस्तावित शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जेमिसन ग्रीर ने व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत कुल 60 देशों पर नए शुल्क की घोषणा की। इनमें भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत 17 देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है, जबकि शेष 43 देशों को 12.5 प्रतिशत शुल्क का सामना करना होगा।

अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि जिन कच्चे माल पर शुल्क लगाने से घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है या जिन वस्तुओं का पर्याप्त उत्पादन अमेरिका में संभव नहीं है, उन्हें इस शुल्क से छूट दी जाएगी। इसके अलावा पूरी अर्थव्यवस्था में व्यवधान पैदा करने वाले उत्पाद भी इस दायरे से बाहर रहेंगे।

यूएसटीआर के अनुसार, यह कार्रवाई उन देशों के खिलाफ की गई है जो बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और उसे लागू करने में विफल रहे हैं। ग्रीर ने कहा कि इस कदम से मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने और वैश्विक श्रमिकों के हितों की रक्षा करने में मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत और अमेरिका के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब अमेरिकी डॉलर का था।'

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