संगीत शिक्षा पाठ्यक्रम में संगीत के माध्यम से गर्भाधान संस्कार विषय को भी जोड़ने की जरूरत: राज्यपाल 

संगीत शिक्षा पाठ्यक्रम में संगीत के माध्यम से गर्भाधान संस्कार विषय को भी जोड़ने की जरूरत: राज्यपाल 

अमृत विचार लखनऊ। शिक्षा चारित्रिक गुणों का उच्चतम विकास करके ऐसे संस्कार देती है, जिसका हम व्यवहारिक जीवन में उपयोग करते हैं। वहीं संगीत मनुष्य को अंतर्मन तक प्रभावित करता है। संगीत शिक्षा सिलेबस में संगीत के माध्यम से गर्भाधान संस्कार विषय को भी जोड़ा जाना चाहिए। ये बात राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने बुधवार को कही। राज्यपाल कुलाधिपति के रूप में भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह के मौके पर सभी छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रही थी।

इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने स्नातक एवं परास्नातक के 155 विद्यार्थियों के अलावा पीएचडी करने वाले तीन विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। राज्यपाल ने 22 मेधावी विद्यार्थियों में 47 पदक भी वितरित किये। सर्वाधिक आठ स्वर्ण पदक कथक नृत्य में एमपीए करने वाली पृथ्वी सिंह को मिले। गायन में एमपीए करने वाली कर्नूरी हरीश को तीन स्वर्ण और एक रजत पदक प्राप्त किया। गायन में बीपीए करने वाले अनुराग मौर्या ने 4 स्वर्ण पदक हासिल किये।

बांसुरी में एमपीए मुकेश कुमार और तबला में बीपीए करने वाले नीलांचल पाण्डेय को तीन-तीन स्वर्ण पदक हासिल हुए। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि सांस्कृतिक विकास देश की समृद्धता का प्रतीक होता है। भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीन और समृद्ध संस्कृति में गिनी जाती है। हमारे देश में संगीत और नृत्य एक साधना है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में शास्त्रीय, भक्ति और लोक संगीत की एक बृहद परम्परा स्थापित है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दीक्षान्त समारोह में उपाधि प्राप्त विद्यार्थी देश-विदेश में भारतीय संगीत को विख्यात करके अपने गुरूजनों और माता-पिता के सम्मान में वृद्धि करेंगे।

राज्यपाल ने दिया जल संरक्षण का संदेश
राज्यपाल ‘‘जल भरो‘‘ कार्यक्रम से दीक्षांत कार्यक्रम की शुरूआत की। इस दौरान उन्होंने ने मटकी में जलधारा डालकर जल संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों द्वारा जितना जल वर्ष भर में उपयोग में लाया जाता है, वो उतने जल संरक्षण हेतु प्रभावी प्रयास करें। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गर्भवती महिला को शिक्षा-प्रद कथा-कहानी, संगीत, नृत्य और नाटिकाओं को सुनने-सुनाने, दिखाने की परम्परा रही है, जिससे गर्भस्थ शिशु तक संस्कार-शिक्षा को पहुँचाया जाये। लेकिन अब ये परम्परा विलुप्त होने लगी है। इसलिए ये जरूरी है कि इसे विश्वविद्यालय स्तर पर पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए।

रोजगार परक पाठ्यक्रम पर फोकस जरूरी
राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में विश्वविद्यालय को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुपालन में रोजगार परक शिक्षा से जोड़ने को भी कहा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को संगीत के साथ-साथ कुछ तकनीकी ज्ञान, कम्पयूटर प्रशिक्षण, सामाजिक गतिविधियों, सेवा कार्यों से भी जोड़ें। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक विश्वविद्यालय को नैक एक्रीडेशन कराना अनिवार्य हो रहा है।  नैक विविध पैरामीटर्स पर मूल्यांकन करता है। इसलिए विश्वविद्यालय अपनी संगीत शिक्षा के साथ-साथ विविधिता का विस्तार भी करे।

सबसे अधिक प्रथ्वी सिंह को मिले ये पदक
- राय उमानाथ बली मेधा स्वर्ण पदक
- युवा आदित्य रंजन स्वर्ण पदक
- लीला वामन राय सडोलीकर स्वर्ण पदक
- डॉ. समर बहादुर सिंह स्वर्ण पदक
- पं. मोहन राव कल्याणपुरकर स्वर्ण पदक
- सरोजा वैद्यनाथन स्वर्ण पदक
- सुभाष चन्द्र द्विवेदी स्वर्ण पदक
-स्वर्गीय सरला श्रीवास्तव स्वर्ण पदक 

गायन एमपीए में कर्नूरी हरीश सिंह मिले ये चार पदक
- पं. वामन राव सडोलीकर स्वर्ण पदक
-  श्रीमती शीला सक्सेना स्वर्ण पदक
- डॉ. सुरेन्द्र कुमार सक्सेना स्वर्ण पदक
- पं. कृष्ण नारायण सतंजनकर रजत पदक 

गायन में एमएपी आम्रपाली गुप्ता को मिले ये पदक
- पं. भातखंडे रजत पदक
- पं. कृष्ण नारायण सतंजनकर कांस्य पदक 

- गायन में बीपीए करने वाले अनुराग मौर्या को स्वर्गीय पुतली बाई स्वर्ण पदक, पं. कृष्ण नारायण सतंजनकर एवं इंदिरा बाई सतंजनकर स्वर्ण पदक, पं. घनानन्द प्रकाश स्वर्ण पदक और स्वर्गीय शिशिर कुमार स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

- गायन में बीपीए मानसी कनौजिया को पं. कृष्ण नारायण सतंजनकर रजत पदक और पं. भातखंडे रजत पदक प्रदान किया गया। गायन में बीपीए विदित जोशी को प. कृष्ण नारायण सतंजनकर कांस्य पदक और पं. भातखंडे कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।

- एमपीए गायन सौम्या श्रीवास्तव को पं. भातखंडे कांस्य पदक, बांसुरी वादन में एमपीए मुकेश कुमार को वीएस निगम स्वर्ण पदक, स्वर्गीय डॉ. मीता सक्सेना स्वर्ण पदक, शिवेंद्र नाथ बसु स्वर्ण पदक दिया गया। बांसुरी में ही एमपीए शशिकांत को पं. भातखंडे रजत पदक से सम्मानित किया जाएगा। एमपीए वायलिन शगुन शुक्ला को पं. भातखंडे कांस्य पदक से सम्मानित किया किया।

- बीपीए बांसुरी राहुल त्रिपाठी को स्वर्गीय मोनिका घोष स्वर्ण पदक और स्वर्गीय कृष्ण चन्द्र पन्त स्वर्ण पदक से नवाजा गया। एमपीए तबला फलेश कुमार श्रीवास्तव को पं. सखाराम मृदंगाचार्य स्वर्ण पदक और स्वामी पागल दास मृदंगाचार्य स्वर्ण पदक मिलेगा। एमपीए तबला स्नेह देवी मौर्या को पं. भातखंडे रजत पदक से सम्मानित किया गया। 

- एमपीए तबला सौम्या सेठ को पं. भातखंडे कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। बीपीए तबला नीलांचल पाण्डेय को पद्मविभूषण पं. किशन महाराज स्वरण पदक, पं. सदाशिव राव स्वर्ण पदक और स्वर्गीय चंटू लाल स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाएगा। बीपीए तबला ईशांक सिंह अरोड़ा को पं. भातखंडे रजत पदक दिया गया। 

- एमपीए कथक नृत्य रिया श्रीवास्तव को पं. भातखंडे रजत पदक दिया गया। एमपीए भरतनाट्यम श्रेया वाजपेयी को स्वर्गीय वसंती सुब्रहमन्यम स्वर्ण पदक, के. मुत्तुकुमारन पिल्लै स्वर्ण पदक और पं. भातखंडे कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। 

- बीपीए भरतनाट्यम शिवम अवस्थी को पं. शिवदास द्विवेदी स्वर्ण पदक और ललिता शास्त्री स्वर्ण पदक दिया गया। बीपीए कथक नृत्य ई ए ईशानी उर्चना को पं. शिवदास द्विवेदी स्वर्ण पदक, बीपीए कथक नृत्य पी के विहांगना रक्षन को पं. भातखंडे रजत पदक तथा बीपीए कथक नृत्य यू एम अमन नेथामी को पं. भातखंडे कांस्य पदक से सम्मानित किया । 

 

 

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