रायबरेली: जिले से विदेश में पशु तस्करी का पकड़ा गया मामला , चार गिरफ्तार ,34 गोवंश बरामद

रायबरेली: जिले से विदेश में पशु तस्करी का पकड़ा गया मामला , चार गिरफ्तार ,34 गोवंश बरामद

अमृत विचार, रायबरेली। उत्तर प्रदेश के जंगलों से घूम रहे बेसहारा गोवंशो को पकड़कर विदेश में तस्करी करने के बड़े मामले का खुलासा पुलिस ने किया है। पुलिस ने 34 गोवंश को बरामद करते हुए  चार लोगों को गिरफ्तार किया है ।इस गिरोह के चार सदस्य फरार भी हो गए है।

यह कामयाबी गुरबख्शगंज पुलिस को बुधवार की रात क्षेत्र के ढकिया चौराहा पर मिली है ।गोवंश लेकर जा रहे एक बड़े कंटेनर को पुलिस ने पकड़ा है। उसमें कुल 34 गोवंश बरामद किए गए जय। इस मामले में पुलिस ने अंसार अली और अली जॉन निवासीगण सैदनपुर थाना सफदरगंज जनपद बाराबंकी , मोहम्मद इस्लाम निवासी आवास विकास कॉलोनी सिविल लाइन रामपुर और मोहम्मद इरफान निवासी गंगागंज थाना नवाबगंज जनपद प्रयागराज को गिरफ्तार किया है ।यह सभी लोग कंटेनर पर सवार थे ।जबकि कंटेनर के साथ चल रही इसी गिरोह की एक कार में सवार मोहम्मद असलम निवासी टाडा , थाना बिलासपुर जिला रामपुर ,अकबर और कैद निवासी गण प्रयागराज तथा एक अन्य निवासी राजस्थान फरार हो गए है। 

गुरुवार को पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी ने मामले की जानकारी करते हुए बताया कि यह मवेशी तस्करी का बहुत बड़ा गिरोह है ,जो उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से बेसहारा मवेशियों को पकड़कर कंटेनर के माध्यम से पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश के लिए तस्करी करता है। पकड़े गए लोगों के विरुद्ध गोवध निवारण अधिनियम ,पशु क्रूरता निवारण अधिनियम सहित विभिन्न संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इनके पास से दो चाकू और एक तमंचा समेत कई अन्य सामग्री बरामद की गई है। इस गिरोह के सदस्यों के विरुद्ध प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कई मामले पंजीकृत हैं।


इस तरह करते थे तस्करी
पकड़े गए इस्लाम ने बताया कि असलम और अकबर तथा एक राजस्थानी व्यक्ति इस पूरे गैंग के सरगना है और मै उन्ही के साथ काम करता है। उसका काम हरदोई, उन्नाव, बाराबंकी, रायबरेली जैसे जनपदों से जानवर बैल ,सांड , गाय ,बछड़ा आदि इकठ्ठा करके कन्टेनर पर लदवाने का है।  कन्टेनर को जंगल मे ले जाकर रात्रि के अँधेरे मे जानवरों को लादा जाता है और जानवरो को लादने के बाद कन्टेनर को पूरी तरह सील कर दिया जाता है। जानवरों के हालत ,हरकत पर निगाह रखने के लिये दो लोग कन्टेनर पर रहते है और एक ड्राइवर जो कन्टेनर मालिक की तरफ से रहता है, उसकी जिम्मेदारी रहती है कि जानवरों से लदे कन्टेनर को बिहार बार्डर पर छोड़े। लदे हुये कन्टेनर से 5 से 7 किलोमीटर आगे वह अपने दो अन्य साथियों के साथ  कार से रहता है तथा रास्ते मे पुलिस द्वारा की जा रही चेकिंग आदि की सूचना देता है। यदि चेकिंग हो रही होती तो कन्टेनर को रोक दिया जाता है और चेकिंग समाप्त होने पर कन्टेनर फिर आगे बढ़ता है। 

कन्टेनर ट्रक मे फास्टैग लगा होने के कारण कोई समस्या नही आती है और इसी तरह पूरा माल बिहार बार्डर तक पहुँचता है। बिहार बार्डर से दूसरी गाड़ी से जानवरों को पश्चिम बंगाल भेजा जाता है। जहां से इन जानवरों की सप्लाई बांग्लादेश को की जाती है। एक जानवर की कीमत 35 से 40 हजार रूपये होती है इस तरह एक ट्रिप मे लगभग 12 से 15 लाख रुपये की कीमत के जानवर सप्लाई किये जाते है। इन जानवरों को एक बार पश्चिम बंगाल तक पहुचने मे 5 से 6 लाख रूपये का खर्च आता है इस तरह लगभग 7 से 8 लाख रूपये की बचत एक ट्रिप मे हो जाती है। बिहार बार्डर तक छोड़ने के लिये ड्राइबर को 12 हजार रूपये दिये जाते है।

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