वेब पर स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचना से मरीजों पर पड़ेगा असर, जानिए डॉक्टर ने और क्या कहा?
कोलकाता। कोलकाता स्थित वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (डब्ल्यूबीयूएचएस), स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. नरेश पुरोहित ने गुरुवार को कहा कि वेब पर स्वास्थ्य संबंधी गलत जानकारी मरीजों के बीच विश्वास की कमी पैदा कर सकती है और डॉक्टर-मरीज के रिश्ते को चुनौती दे सकती है। डॉ. पुरोहित, जिन्होंने कोलकाता स्थित बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज द्वारा आयोजित ‘डॉ. गूगल- अच्छा या बुरा’ विषय पर एक वेबिनार में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए कई मरीज़ पहले इंटरनेट पर अपने ‘मुद्दों पर शोध’ करते हैं। डॉ. पुरोहित ने कहा, “हम अत्यधिक सूचना की दुनिया में रह रहे हैं जो एक बटन के क्लिक पर उपलब्ध है। सोशल मीडिया पर जानकारी लेना, यह अच्छा और बुरा दोनों हो सकता है। कोविड महामारी के बाद स्व-निदान के लिए ‘डॉ. गूगल’ के उपयोग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।"
उन्होंने कहा कि ‘डॉ.गूगल’का उपयोग करने के कारण अलग-अलग हैं जबकि कुछ लोग इसका उपयोग स्वास्थ्य पर नियंत्रण पाने और डॉक्टरों के साथ बेहतर संवाद करने के लिए पसंद करते हैं। कुछ लोग गलत निदान को रोकने के लिए एहतियाती उपाय के रूप में इसका उपयोग करते हैं।
उन्होंने कहा कि डॉक्टर द्वारा निदान किए जाने के बाद किसी बीमारी के बारे में अधिक जानना उपयोगी हो सकता है, लेकिन ऑनलाइन स्त्रोत के भरोसे रहकर आत्म-निदान का उपयोग करते समय सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने वेब और सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भरोसेमंद स्रोत और सटीक जानकारी को प्रेषित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "किसी को याद रखना चाहिए, ‘डॉ. गूगल’ के पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है।"
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