कानपुर किडनी कांड : 35-40 हजार कमीशन वाले हापुड़ व नोएडा के ओटी टेक्नीशियन अरेस्ट, अन्य की तलाश में जुटी पुलिस
कानपुर, अमृत विचार। अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जानकारी के मुताबिक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए फ्लाइट से कानपुर आए दो ओटी टेक्नीशियन गुरुवार को पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। किडनी कांड रैकेट से जुड़े दोनों टेक्नीशियन शहर से भागने के फिराक में थे, तभी कल्याणपुर स्थित दलहन के पास से पुलिस ने उन्हें दबोचा लिया।
पकड़ा गया ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह हापुड़ व राजेश कुमार नोएडा का है। दोनों टेक्नीशियन को कमीशन के तौर पर 40-40 हजार रुपये मिलते थे। ऑपरेशन के दौरान दोनों काम डॉक्टर को सर्जरी उपकरण व दवाएं उपलब्ध कराना था। दोनों डॉ. अफजाल की टीम के साथ शहर आते थे। आहूजा, प्रिया और मेड लाइफ हॉस्पिटल ही नहीं पुलिस की जांच में अब तक छह और बड़े अस्पतालों के नाम सामने आए हैं।
जानकारी होने के बाद भी पुलिस ने अभी तक इन अस्पतालों के नाम नहीं खोले हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार इन अस्पतालों की ओटी में किडनी ट्रांसप्लांट का अवैध कारोबार चल रहा था। ट्रांसप्लांट की जानकारी मिलने पर जब पुलिस ने अस्पतालों का सीसीटीवी फुटेज मांगा तो डीवीआर मौजूद नहीं था। इसके अलावा कई तरह के बहाने बनाए गए। पुलिस अब इन अस्पतालों के स्टॉफ से पूछताछ कर रही है।
इसके अलावा उक्त अस्पतालों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है। जिससे कोई साक्ष्य हाथ लगे। सूत्रों की माने तो किडनी ट्रांसप्लांट का यह कारोबार बड़ी सावधानी से किया जा रहा था, जिससे बचा जा सके। यहीं कारण है कि रैकेट में शामिल लोगों को छोड़कर पूरे स्टॉफ को छुट्टी दे दी जाती थी और ऑपरेशन भी रात में ही किया जाता था। ट्रांसप्लांट के दौरान करीबी स्टॉफ को भी ओटी की तरफ जाने की पाबंदी थी।
ओटी में पूरा स्टॉफ डॉ. अफजाल और डॉ. रोहित का बुलाया होता था। यह लोग ट्रांसप्लांट के बाद रवाना हो जाते थे। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद डोनर व रिसीवर को अलग-अलग अस्पतालों में उन्हीं डॉक्टरों की देखरेख में रखा जाता था।
गर्लफ्रेंड के सवाल पर आयुष ने बताई मजबूरी
लखनऊ रेफर होने से पहले हैलट के सुपर स्पेशसिलयिटी अस्पताल की छठवीं मंजिल पर आईसीयू में भर्ती आयुष को उसकी गर्लफ्रेंड से मिलवाया गया। पुलिस की कड़ी सुरक्षा में आयुष की गर्लफ्रेंड उससे मिली। कानपुर पहुंचने पर उसकी सुरक्षा में तीन पुरुष, एक महिला दरोगा व एक कांस्टेबल थे। आयुष की गर्लफ्रेंड के साथ आईसीयू में तीन दरोगा मौजूद थे। गर्लफ्रेंड को देखकर आयुष के आंखों से आंसू निकलने लगे तो उसने सिर पर हाथ फेरकर ढांढ़स बंधाया।
गर्लफ्रेंड ने आयुष से पूछा कि किडनी क्यो डोनेट की। इसके जवाब में आयुष ने फीस की मजबूरी बताई। उसने कहा कि इसी वजह से वह दो माह से परेशान था। तभी वह शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काणा के संपर्क में आया। उसकी बातों में आकर किडनी डोनेट कर दी। इस पर गर्लफ्रेंड ने नाराजगी जताई। उसने डॉक्टरों से आयुष के स्वास्थ्य की जानकारी ली।
उसने आयुष को बताया कि उसकी मां काफी परेशान है। आने की बात कह रही थीं। गर्लफ्रेंड ने पुलिस को बताया कि आयुष का छोटा भाई ऋषभ प्राइवेट नौकरी करता है। वह आईसीयू से बाहर निकली, लेकिन मीडियाकर्मियों को देखकर आईसीयू में चली गई। फिर पुलिसकर्मियों ने उसे पीछे के गेट से बाहर किया। आयुष की गर्लफ्रेंड उसी के साथ पढ़ती है।
आहुजा व प्रिया हॉस्पिटल के लाइसेंस सस्पेंड
कानपुर में कल्यानपुर के केशवपुरम स्थित जिस आहुजा हास्पिटल में अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट का खेल चल रहा था, उसका लाइसेंस गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सस्पेंड कर दिया है। इसके अलावा प्रिया हॉस्पिटल का लाइसेंस भी संस्पेड किया गया है। दोनों अस्पतालों को नोटिस जारी किया है कि तीन दिनों में अस्पताल को खाली कर दिया जाए और सामान को बाहर निकाल लिया जाए।
