बाराबंकी की ‘विद्युत सखी’ राजश्री शुक्ला बनीं बदलाव की मिसाल, स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गांव में बनाई पहचान

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार: बाराबंकी की राजश्री शुक्ला ‘विद्युत सखी’ के रूप में महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से जुड़कर उन्होंने न केवल रोजगार पाया, बल्कि पूरे गांव में भरोसेमंद पहचान भी बनाई। राजश्री घर-घर जाकर बिजली बिल संग्रह करती हैं, जिससे ग्रामीणों को लंबी कतारों से राहत मिली है। अब तक वे 81 हजार से अधिक बिलों का भुगतान सुनिश्चित कर लगभग ₹18 करोड़ से ज्यादा राशि जमा करा चुकी हैं। 

उनकी वार्षिक आय भी 10 लाख रुपये से अधिक पहुंच गई है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। वर्ष 2021 में ‘राधा स्वयं सहायता समूह’ से जुड़कर उन्होंने मात्र 30 हजार रुपये से शुरुआत की थी। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद उन्होंने गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को डिजिटल भुगतान और सरकारी सेवाओं से जोड़ा। आज गांव के लोग स्वयं उन्हें बुलाकर बिल भुगतान में मदद लेते हैं। राज्य स्तर पर भी उनकी सराहना हो चुकी है और उन्हें कई अवसरों पर सम्मानित किया गया है।

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