कल नहाय खाय के साथ शुरु होगा सूर्य उपासना का महापर्व छठ, पुत्रों की लंबी आयु व अच्छे स्वास्थ्य के लिए माताएं रखती हैं कठोर व्रत

कल नहाय खाय के साथ शुरु होगा सूर्य उपासना का महापर्व छठ, पुत्रों की लंबी आयु व अच्छे स्वास्थ्य के लिए माताएं रखती हैं कठोर व्रत

प्रयागराज। पुत्र की दीर्घायु और सकुशलता के लिए माताओं द्वारा रखे जाने वाला व्रत सूर्य उपासना के महापर्व छठ की शुरुआत 17 नवंबर को नहाय-खाय से शुरु होगी। इससे पहले ही सूर्यषष्ठी के गीतों ओर गूंज सुनाई देने लगी है। इस महापर्व को लेकर संगम स्थित गंगा और बलुआघाट के यमुना घाट पर अधिकारियों और संस्थाओं के द्वारा देर रात तक तैयारियों को पूरा कर लिया है।

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माताएं नहाय खाय के बाद 18 नवंबर को खरना के बाद 19 को निर्जल उपवास के साथ अस्त होते हुए सूर्य को,जबकि 20 को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ महापर्व का समापन करेंगी। पूर्वांचल विकास एवं छठ पूजा समिति की ओर से छठ महापर्व महोत्सव के आयोजन को लेकर संगम तट पर पूरी तैयारियां कर ली गई  है।

संयोजक अजय राय की अगुवाई में समिति के कार्यकर्ताओं ने संगम के आसपास बल्लियां लगवा कर लाईट और साउंड के साथ साथ ही शिविर कार्यालय को बनवा दिया है। संयोजक अजय राय के मुताबिक संगम तट की सफाई और पूजा में सहयोग करना भी भी पुण्य का कार्य है। सभिनके सहयोग से संगम पर महाछठ पर्व भव्यता और धूम धाम से मनाया जाता रहा है। 

ज्योतिर्विदों के अनुसार छठ पर्व के तीसरे दिन शाम 5.22 बजे अस्ताचलगामी सूर्य व चौथे दिन 20 नवंबर को सुबह 6.39 बजे उगते सूर्य को अर्घ्य दिये जाने का मुहूर्त है। अर्घ्य देने के बाद सूपों में रखा सामान भगवान सूर्य और माता षष्ठी देवी को अर्पित किया जायेगा। गुरुवार को संगम के अलावा रामघाट, दशाश्वमेध घाट, यमुना के बलुआ घाट, अरैल घाट और झूंसी के तटों पर पूजन के लिए वेदियां बनाने और अपनी  जगह बनाने के लिए पहले से लोग पहुंचकर निशान लगा रहे है।

पंडित विमलेश त्रिपाठी, शास्त्री के अनुसार पहले दिन ही पांच शुभ योग है। जिसमें (धृतियोग, प्रवर्धमान नामक औदायिक योग, जय योग, रवियोग और द्विपुष्कर) और तीसरे दिन धनिष्ठा नक्षत्र वृद्धि और ध्रुव नामक दो शुभ योग की स्थिति है। वहीं छठ महापर्व का समापन (धनिष्ठा नक्षत्र, ध्रुव योग तथा औदायिक) भी शुभ योग में बन रहा है।

छठ पूजा पर्व में व्रत, उपवास, उपासना पूजा, अर्घ्य और पूजा मे उपयोग किये जाने वाली वस्तुओं की पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। छठ व्रत रोगों से मुक्ति, संतान के सुख और समृद्धि में वृद्धि के लिए रखती है। नहाय खाय से शुुरुआत के दूसरे दिन खरना को व्रती महिलाएं उपवास करेंगी। शाम को पूजा करने के बाद व्रत का पारण करेंगी। तीसरे दिन महिलाएं निर्जल उपवास रखेंगी। पर्व के चौथे दिन सूर्योदय के समय महिलाये अर्घ्य पारण फिर से पारण करेंगी।

प्रशासन ने शुरु कराई तैयारी

डाला षष्ठी व्रत की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेला प्रशासन की ओर से घाटों पर महिलाओं को कपड़े बदलने के लिए रूम बनाने का काम किया गया है। इसके साथ ही जहां कटान है वहा पर समतलीकरण कराया गया है। गुरुवार को रामघाट पर जेसीबी लगाकर पाटी को पाट दिया गया है। 

महापौर ने छठ की तैयारियों का लिया जायजा

महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी ने गुरुवार को गंगा-यमुना के घाटों पर डाला छठ पर्व की तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने नगर निगम के अलावा मेला प्रशासन के अधिकारियों को कटान पाटने के साथ ही समतलीकरण कर समय रहते तटों पर बिजली, पानी और सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

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