बरेली: ...जब संसद में संतोष के सवाल पर कर दिया था गुमराह

इफको में भूदाताओं को रोजगार न देने पर साल 1991 में संतोष गंगवार ने संसद में उठाए थे सवाल

बरेली: ...जब संसद में संतोष के सवाल पर कर दिया था गुमराह

बरेली/आंवला, अमृत विचार। किसानों की जमीन लेकर उनको नौकरी न देना पड़े, इसके लिए इफको प्रबंधन ने झूठ की सभी सीमाएं पार कर दीं। कई साल पहले इफको को जमीन देने के बाद भूदाताओं ने धरना प्रदर्शन करने के दौरान भी लाठियां खाईं और जेल गए। इसको लेकर 24 जुलाई 1991 को सांसद संतोष गंगवार ने संसद में भूदाताओं और क्षेत्रीय लोगों को रोजगार से जुड़े सवाल किए थे तब भी गुमराह किया था।

सांसद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री से इफको आंवला प्लांट की शुरुआत के समय में नियोजित श्रमिकों की संख्या, वर्तमान की संख्या, कितने भूदाताओं को स्थाई रोजगार दिया गया और शेष को कब तक शामिल करने की जानकारी मांगी थी। तत्कालीन रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के राज्य मंत्री डाॅ. चिंता मोहन ने इफको के हवाले से सांसद को बताया था कि 1986 में जब प्लांट की शुरुआत हुई थी, तब उस समय तकरीबन 689 श्रमिक थे। 24 जुलाई 1991 में इनकी संख्या बढ़कर 986 पहुंच गई। जिनमें 308 श्रमिक बरेली के हैं। 

राज्यमंत्री ने दावा किया था इफको ने उन सभी भूदाता किसानों को सीधे रोजगार दिया है जिन्होंने अपनी 60 प्रतिशत से अधिक जमीन दी थी। अन्य भूदाता किसानों को रिक्तियों की उपलब्धता और उनके द्वारा आवश्यक कौशल प्राप्त करने के अधीन रोजगार प्रदान करना संभव हो सकता है। अकुशल नौकरियों के लिए रोजगार की संभावना बहुत सीमित है।

सेंधा गांव के ओमशंकर सक्सेना बताते हैं कि इफको ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय को गलत तथ्य पेश किये थे। 60 से 100 प्रतिशत जमीन देने वाले कई किसान रोजगार के लिए आज भी संघर्ष कर रहे हैं। वह भी उन्हीं किसानों में शामिल हैं। जब किसानों ने 27 दिसंबर 2018 से 12 जनवरी 2019 तक धरना प्रदर्शन किया था। इस दौरान इफको अधिकारियों ने रिक्तियां निकलने पर भूदाताओं को 50 प्रतिशत भर्ती करने का लिखित समझौता किया पर आज तक कोई अमल नहीं हो सका। आरोप लगाया कि इफको ने वर्ष 2005 से अब तक एक भी भूदाता को स्थाई रोजगार नहीं दिया है। जबकि वर्ष 2021 से अब तक इफको में करीब तीन सौ लोगों को स्थाई रोजगार दिए गए हैं। जिनमें अधिकतर इफको अधिकारियों के संबंधी हैं। भूदाता रोजगार मांगते हैं तो रिक्तियां न होने का हवाला देकर उनको टरका दिया जाता है।

तहसील प्रशासन आज करेगा किसानों की जमीन की पैमाइश
आंवला: नौगवां गांव निवासी छह किसानों ने इफको द्वारा जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाकर अदालत की शरण ली थी। अदालत ने तहसील प्रशासन को जमीन की पैमाइश कर चिह्नित करने का आदेश दिया था। तहसील टीम रविवार को किसानों की जमीन की पैमाइश करने पहुंची थी। इफको अधिकारियों ने अवकाश का हवाला देकर पैमाइश न करने का अनुरोध किया था। जिसपर टीम वापस लौट गई थी। वहीं किसान नेता ओमशंकर सक्सेना ने बताया कि तहसील प्रशासन ने मंगलवार की दोपहर में पैमाइश करने की सूचना दी है।

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